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Saturday, October 11, 2025

मिट्टी ने बदली तकदीर - बंजर ज़मीन पर लहलहाई हरियाली, किसान रामनारायण ने मनरेगा से रची सफलता की कहानी भूमि समतलीकरण से उपजाऊ बने खेत, बढ़ी रामनारायण की उम्मीदें मनरेगा के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला संबल

 मिट्टी ने बदली तकदीर - बंजर ज़मीन पर लहलहाई हरियाली, किसान रामनारायण ने मनरेगा से रची सफलता की कहानी




भूमि समतलीकरण से उपजाऊ बने खेत, बढ़ी रामनारायण की उम्मीदें

मनरेगा के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला संबल

     जांजगीर-चांपा 10 अक्टूबर 2025/ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत भूमि समतलीकरण कार्य से किसान रामनारायण के चेहरे पर खुशियां लौट आई हैं। जिस खेत में पहले ऊबड़-खाबड़ ज़मीन और पानी का ठहराव खेती में बाधा बनता था, अब वहीं हरी-भरी फसलें लहलहा रही हैं।

     जिले की बलौदा विकासखंड की ग्राम पंचायत बगडबरी में किसान की बंजर और असमतल भूमि को मनरेगा से समतल कर खेती योग्य बनाया गया। इस कार्य से न केवल मिट्टी और जल संरक्षण में सुधार हुआ, बल्कि ग्रामीण को रोजगार भी मिला। मनरेगा योजना के तहत किए गए भूमि समतलीकरण कार्य ने ग्राम पंचायत बगडबरी विकासखंड बलौदा के किसान श्री रामनारायण आदिले के जीवन में एक नई उम्मीद जगा दी है। जिस ज़मीन को कभी बंजर मानकर छोड़ दिया गया था, आज वहीं पर सुनहरी फसलें लहरा रही हैं। ग्राम पंचायत बगडबरी में भूमि समतलीकरण कार्य रामनारायण का प्रस्ताव ग्राम सभा में पारित किया गया था। तकनीकी स्वीकृति प्राप्त होने के बाद पंचायत से 95 हजार 644 रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति राशि प्राप्त हुई। कार्य की शुरुआत अक्टूबर 2023 को की गई और नवंबर 2023 को कार्य पूर्ण हुआ। इस कार्य से 9 श्रमिक परिवारों को रोजगार मिला तथा 388 मानव दिवस सृजित हुए।

     किसान रामनारायण की भूमि बंजर और ऊबड़-खाबड़ थी। बरसात का पानी खेतों में रुक नहीं पाता था, जिससे उत्पादन लगभग असंभव था। स्थिति को देखते हुए उन्होंने ग्राम सभा में प्रस्ताव रखकर भूमि समतलीकरण कार्य की मांग की। तकनीकी सहायकों की देखरेख में कार्य प्रारंभ किया गया। तकनीकी सहायक, रोजगार सहायक की उपस्थिति में काम की प्रगति पर निरंतर नज़र रखी गई। कार्य की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने हेतु नियमित माप-तौल की गई और तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। कार्य पूर्ण होने के बाद रामनारायण आदिले की बंजर भूमि पूरी तरह समतल हो गई। एक माह के भीतर उन्होंने खेत की जुताई की और पहली बार धान की फसल बोई। परिणामस्वरूप इस जमीन पर उन्हें चार क्विंटल धान का उत्पादन हुआ।

      किसान का कहना है कि पहले इस भूमि में कुछ भी उपज नहीं पाता था, लेकिन समतलीकरण के बाद अब मिट्टी की उर्वरता में सुधार आया है और खेत में पानी भी टिकता है। गांव के अन्य किसान अब इस सफलता को देखकर अपनी बंजर भूमि पर भी इसी प्रकार का कार्य करवाने में रुचि दिखा रहे हैं। रोजगार सहायक ने बताया कि यह मनरेगा योजना का उत्कृष्ट उदाहरण है जहाँ एक छोटे से कार्य ने किसान के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। मनरेगा योजना के तहत भूमि सुधार कार्यों ने ग्राम्य अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा भर दी है। अब बंजर जमीनें उपजाऊ बन रही हैं, जिससे न केवल खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा है बल्कि ग्रामीणों को स्थानीय रोजगार भी मिला है। श्री रामनारायण आदिले की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही दिशा में की गई छोटी पहल भी ग्रामीण विकास की बड़ी मिसाल बन सकती है। रामनारायण ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि भूमि समतलीकरण के बाद खेतों में हल चलाना और सिंचाई करना आसान हुआ है। अब एक ही जगह पानी ठहरने से फसलों को नुकसान नहीं होता।

जांजगीर से विक्रम कुमार सूर्यवंशी की रिपोर्ट

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