बस्तरिहा मन के मनमोहक मांदरी नृत्य होथे नयनाभिराम*
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के लोक कला देस ही नहीं भलुक आने देस अउ दुनिया भर म शोर बगरे हावय । जेन हा अपन ठेठ आदिवासी परिधान ले सुसज्जित आने आनै परब तिहार अउ उत्सव म नाचत गावत देखे जा सकथे।ए आदिवासी मन बहुतेच भोला होथे जेन अपन दिनभर के थके मांदे बेरा ला बिताय खातिर रथिया रथिया अपन अउ दूसर के स्वस्थ रंजन करथे। जेहा बस्तर के बीहड़ वनांचल जिहां अबुझमाड जनजाति मन के बसेरा छेत्र माने जाथे। जिहां के जीवन यापन संस्कृति सभ्यता आम जनजीवन ले कई कोस दूरिहा राहय,।ए बात ला बछर 80 के दशक म शामिल पाठ्यक्रम बाल भारती के कक्षा पांचवीं म पढे बर मिले रिहिस।जेमा दिनभर काम बूता करके रात म जवान टुरी-टुरा जेला चेलिक मोटिरारी केहे जाथे , वोमन ला रिलो नाचे के , आदिवासी नृत्य नाचे गाय के ,अउ उनकर द्वारा बनाय नियम घोठुल म जाय के पूरा छुट रथे।घोठुल हा उनकर द्वारा बनाय गिये लकड़ी अउ माटी के घर होथे, अउ नियम घलो होथे।केहे के मतलब ये हे कि यदि कोनो जवान टुरी-टुरा के एक दूसर के मन पसन्द हो जाय,ता नाचत गावत वो घोटुल म खुसर जावय, तहां ले उनकर सियान अउ समाज के मन दुनो के बिहाव कर देवय। अइसन संस्कृति रहन-सहन जन-जीवन रीति-रिवाज ले भरे बस्तर छेत्र के जनजाति आज घलो अपन परम्परा ला लोकरंजन अउ मनोरंजन ला समाज के सेवा के रूप म बनाय राखे हे। जिहां आज घलो बेरा-बेरा म रीलो या मांदरी नृत्य करे जाथे,जेमे जवान जवान कुवांरी कुंवारा टुरी-टुरा मन आपस में सुमता सलाह मढ़ा के रथिया जेवन पानी खा पी के गांव के चौक या गुड़ी करा जुरिया के नाचथे गाथे अउ खुसी मनाथे।
इहां के परसिध ए नृत्य ला बस्तरिहा,मांदरी , मारिया या आने आनै नाव ले सम्बोधित करे जाथे जेमे।अब ए नृत्य उंकर गांवे तक सीमित नइहे, अब तो देस दुनिया के आने आनै धारमिक सामाजिक राजनीतिक मंच महोत्सव म घलो प्रस्तुति होय ला धर लेहे। जेमे अब तक ए बस्तरिहा नृत्य हा देश विदेश तक अपन परचम लहरावत हे।एमे शामिल कलाकार मन मुड़ी मा रंग-बिरंगी पागा कलगी मंजुर पांख, नोनी मन पारम्परिक लुगरा बाबू मन सादा रंग के पाटा माडी तक करारी धोती अउ रंग*बिरंगी कौड़ी माला सिंगार करके मांदर-मांदरी ढोलकी चुटकी जइसन बाजा ला बजाथे नाचथे गाथे।
बस्तर के आदिवासी मन के परसिध ए नृत्य के परभाव इंखर तीर-तखार छेत्र म घलो देखें बर मिलथे , जिहा बस्तर जगदलपुर कोण्डागांव केशकाल नारायणपुर कांकेर के संग संग नगरी सिहावा दुगली, गट्टासिल्ली छेत्र के गेदरा गुडरापारा गुहाननाला डोमपदर जुझराकसा, भोभलाबाहरा आदी गांव म एकर संचालन होथे। जेहा निजी चरझनिया अउ सरकारी मंच के छोड़ गांव स्तर म दुख सुख मरनी-हरनी बर -बिहाव छट्ठी जनम दिन जयंती अवसर आदी अवसर म घलो बरोबर भाग लेथे।


















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