सनातन एकता यात्रा का निमंत्रण देने केलि कुंज पहुंचे धीरेन्द्र शास्त्री
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
वृंदावन - बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री आज वृंदावन के आध्यात्मिक गुरु संत प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिये उनके आश्रम केली कुंज पहुंचे। आश्रम में पहुंचते ही धीरेंद्र शास्त्री ने प्रेमानंद महाराज को दंडवत प्रणाम किया , इसके बाद संत प्रेमानंद ने धीरेंद्र शास्त्री को गले लगाकर स्वागत किया और पटुका पहनाकर सम्मानित किया। धीरेंद्र शास्त्री ने संत प्रेमानंद महाराज का स्वास्थ्य का हाल-चाल पूछते हुये उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। प्रेमानंद महाराज वर्तमान में अस्वस्थता के बावजूद अपने नियमित सेवा कार्यों और प्रवचनों में संलग्न हैं , जिसे देखकर धीरेंद्र शास्त्री ने उनकी आध्यात्मिक दृढ़ता की सराहना की। प्रेमानंद ने कहा - भगवान का नाम अवश्य लेना चाहिये , उससे माया भाग जाती है क्योंकि भगवान के नाम गुण में अपार शक्ति है। भगवान के नाम और गुण का श्रेय ले लिया तो वह व्यक्ति पार हो गया , अन्यथा ज्ञान विज्ञान कोई ऐसा नहीं है जो इस माया से निकाल सकता है। भगवान का नाम और गुण लेने से ही माया छूट सकती है , भगवान के नाम से ही माया रास्ता दे देती है। क्योंकि माया भगवान की दासी है , जहां थोड़ा सा अहम हुआ वहां प्रश्न वाचक चिन्ह माया लगा देती है। आप भगवान के पार्षद हैं , आप कभी माया में नहीं फंस सकते। भगवान के यश में इतनी समर्थ है , केवल भगवान का नाम से ही मुक्ति मिल जाती है। संत प्रेमानंद महाराज ने कहा बिना सनातन के किसी की भी सत्ता नहीं है , कहीं भी कोई भी हो उसको सनातन से जुड़ना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सनातन सूर्य है , सनातन वायु है , सनातन आकाश है , सनातन ही भूमि है। वायु से जुड़ना , सूर्य के प्रकाश से जीना , आकाश के नीचे रहना और धरती में रहना यह सनातन ही है। ब्रह्म स्वरूप सनातन है , सनातन को किसी व्यक्ति ने स्थापित नहीं किया , ये स्वयंभू है। जैसे वेद स्वयंभू है तो वेद भी सनातन ही है। आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री अपनी “सनातन एकता पदयात्रा” का निमंत्रण देने के उद्देश्य से वृंदावन पहुंचे थे। उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से आग्रह किया कि वे इस यात्रा में अपने आशीर्वाद और भावनात्मक उपस्थिति के माध्यम से शामिल हों। शास्त्रीजी ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य समाज में सनातन मूल्यों की पुनर्स्थापना और एकजुटता को बल देना है। इस पर संत प्रेमानंद महाराज ने कहा कि आचार्य शास्त्री सनातन के युगधर्म का पालन कर रहे हैं। आप समाज को सनातन का दर्शन करा रहे हैं। ईश्वर आपको दीर्घायु करें ताकि धर्म का प्रकाश हर दिशा में फैले। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस यात्रा में ‘भाव रूप’ से शामिल रहेंगे। दोनों प्रमुख धर्माचार्यों की इस व्यक्तिगत मुलाकात को धर्म और अध्यात्म जगत के लिये एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है , जाओ एक अद्भुत आध्यात्मिक मिलन की साक्षी बनी।


















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