अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता
दिवस आज-सहिष्णुता के महत्व और असहिष्णुता के दुष्प्रभावों को अवगत और जागरूकता के लिए मनाया जाता है।
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
इस धरती पर मानव से लेकर जीव-जंतु निवास करते है जहां पर मानव के बीच कई तरह के भाव आते है प्रवृत्ति में धैर्य, उदारता या कहें सहिष्णुता सदा बनी रहती है। यहां सहिष्णुता या सहनशीलता का होना महत्व होता है। इस प्रवृत्ति को बताने के लिए हर साल अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस मनाया जाता है। यह खास दिन लोगों को वैश्विक सहिष्णुता के महत्व और असहिष्णुता के दुष्प्रभावों के प्रति अवगत और जागरुक किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस के इतिहास की बात करें तो, सहिष्णुता दिवस को मनाने का प्रयास UNESCO ने 16 नवंबर 1995 को किया था जहां पर साल 1996 में UNO ने 16 नवंबर को इस दिन को मनाने की शुरुआत की। बताया जाता है कि,सहिष्णुता के अंतर्गत ये सभी भाव धैर्य, उदारता और सहनशीलता आ जाते है। इस दिवस को लेकर खास बात यह भी है कि, यहां पर सहिष्णुता और अहिंसा के प्रचार के लिए हर साल यूनेस्को द्वारा मदन जीत सिंह पुरस्कार देने की परंपरा होती है। इस पुरस्कार में विजेता को एक लाख अमेरीकी डालर की पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है। ये पुरस्कार विज्ञान, कला, संस्कृति अथवा संचार के क्षेत्र में सहिष्णुता और अहिंसा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए काम के लिए दिया जाता है।
सहिष्णुता के अर्थ को समझना जरूरी
अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस के मौके पर सहिष्णुता के अर्थ को समझने के लिए आज के समय की स्थिति को परखना जरूरी है। यहां पर आज की जीवनशैली में हम अगर देखते है तो, हर किसी को अब किसी काम को करने की जल्दी होती है। धैर्य, संयम, और सहनशक्ति जैसे शब्दों का अस्तित्व कम हो जाता है। यहां पर देशभर में हिंसा की बढ़ती घटनाओं के बीच सहिष्णुता को बनाए रखना जरूरी होता है। अगर हर जगह सद्भाव की भावना विद्यमान रहेगी तो जाहिर सी बात है कि, वास्तविक सहिष्णुता वाला दिवस आ जाएगा।


















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