सुदामा चरित्र भगवान श्री कृष्ण और उनके प्रिय मित्र सुदामा की निःस्वार्थ मित्रता, संतोष और सच्ची भक्ति का अद्भुत और मार्मिक प्रसंग है :अशवंत तुषार साहू
यह बहुत ही पुण्य और सौभाग्यशाली अवसर है!
महासमुंद : आमा सिवनी में लक्ष्मी नाथ साहू जी और साहू परिवार के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण का सफल आयोजन हुआ। जिसमे भाजपा किसान नेता अशवंत तुषार साहू शामिल हुआ, कथा के अंतिम दिन, सुदामा चरित्र की लीला का रसपान करना अत्यंत ही भावुक और प्रेरणादायक क्षण रहा ।
सुदामा चरित्र भगवान श्री कृष्ण और उनके प्रिय मित्र सुदामा की निःस्वार्थ मित्रता, संतोष और सच्ची भक्ति का अद्भुत और मार्मिक प्रसंग है।
सुदामा चरित्र, कृष्ण लीला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो एक दरिद्र ब्राह्मण और द्वारकाधीश श्री कृष्ण के बीच सच्ची मित्रता का उदाहरण है। सुदामा अपनी पत्नी के कहने पर द्वारका जाते हैं, जहाँ वे अपने मित्र कृष्ण से मिलते हैं, और जो चने वे भेंट के लिए लाए थे, वह श्री कृष्ण द्वारा प्रेमपूर्वक छीनकर खा लिए जाते हैं। कृष्ण अपनी इस लीला से सुदामा की निर्धनता दूर कर देते हैं, जिससे उनकी कुटिया की जगह एक भव्य महल बन जाता है। आयोजक लक्ष्मी नाथ साहू जी और साहू परिवार को इस धर्ममय आयोजन के लिए बहुत-बहुत बधाई!


















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