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Wednesday, November 19, 2025

झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई जयंती आज-झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की शौर्य गाथा को याद करने और नमन करने का दिन ।

 झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई जयंती आज-झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की शौर्य गाथा को याद करने  और  नमन करने का दिन ।



सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी। 

झांसी रानी लक्ष्मीबाई की जयंती 19 नवंबर को मनाई जाती है। हर साल इस दिन झांसी की रानी की वीरता को नमन किया जाता है और अंग्रेजों के खिलाफ उनकी शौर्य गाथा को याद किया जाता है। स्कूल के दिनों से ही बच्चे-बच्चे को रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी या शौर्य  गाथा सुनाई जाने लगती है। वह झांसी की रानी थीं, जो अपने पति और पुत्र को खो चुकी हैं और दत्तक पुत्र के लायक होने तक खुद एक महिला होकर झांसी का शासन संभाल रही थीं। हालांकि अंग्रेज हुकूमत ने झांसी को अपने अधिकार क्षेत्र में लेने का प्रयास किया और झांसी के किले पर आक्रमण कर दिया। रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब दिया। घोड़े पर सवार लक्ष्मीबाई की पीठ पर उनका पुत्र था और वह अंग्रेजों के सीने को चीरते हुए अपना रास्ता बना रही थीं।


झांसी की रानी का जीवन परिचय-


बनारस में 19 नवंबर 1828 को जन्मी लक्ष्मीबाई का बचपन का नाम मणिकर्णिका था। प्यार से उन्हें मनु कहा जाता था। उनके पिता मोरोपंत तांबे और मां भागीरथी सप्रे थीं। वह मनु चार साल की थीं, तभी उनकी मां की निधन हो गया। पिता बिठूर जिले के पेशवा बाजी राव द्वितीय के लिए काम करते थे। उन्होंने लक्ष्मी बाई का पालन पोषण किया। इस दौरान उन्होंने घुड़सवारी, तीरंदाजी, आत्मरक्षा और निशानेबाजी की ट्रेनिंग ली।


रानी लक्ष्मीबाई का परिवार-


14 साल की उम्र में 1842 में मनु की शादी झांसी के शासक गंगाधर राव नेवलेकर से कर दी गई। शादी के बाद उनका नाम लक्ष्मीबाई पड़ा। उस दौर में शादी के बाद लड़कियों का नाम बदल जाता था। विवाह के बाद लक्ष्मी बाई ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसकी मृत्यु महज चार महीने में ही हो गई। बाद में उनके पति और झांसी के राजा का भी निधन हो गया। पति और बेटे को खोने के बाद लक्ष्मी बाई ने खुद ही अपने साम्राज्य और प्रजा की रक्षा की ठान ली।


झांसी पर कब्जा करने का षड़यंत्र-


उस समय ब्रिटिश इंडिया कंपनी के वायसराय डलहौजी ने झांसी पर कब्जे का यह बेहतर समय समझा क्योंकि राज्य की रक्षा के लिए कोई नहीं था। उन्होंने रानी लक्ष्मी बाई पर दबाव बनाना शुरू किया कि झांसी को अंग्रेजी हुकूमत के हवाले कर दें। रानी ने रिश्तेदार के एक बच्चे को अपना दत्तक पुत्र बनाया, जिनका नाम दामोदर था।


अंग्रेजों और झांसी की रानी के बीच युद्ध-


अंग्रेजी हुकूमत ने दामोदर को झांसी का उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया और झांसी का किला उनके हवाले करने को कहा। अंग्रेजों ने साम्राज्य पर कब्जा करने की कोशिश की लेकिन लक्ष्मी बाई ने काशी बाई समेत 14000 बागियों की एक बड़ी फौज तैयार की। 23 मार्च 1858 को ब्रिटिश फौज ने झांसी पर आक्रमण कर दिया और 30 मार्च को बमबारी करके किले की दीवार में सेंध लगाने में सफल हुए। 17 जून 1858 को लक्ष्मीबाई आखिरी जंग के लिए निकली। पीठ पर दत्तक पुत्र को बांधकर हाथ में तलवार लिए झांसी की रानी ने अंग्रेजों से जंग की।

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