राज्य कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ के प्रांतीय अधिवेशन का समापन
प्रांत प्रचारक अभयराम जी का “पंच परिवर्तन” पर प्रेरणादायी बौद्धिक उद्बोधन। सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
रायपुर- राज्य कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ के प्रांतीय अधिवेशन के समापन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छत्तीसगढ़ के प्रांत प्रचारक श्री अभयराम जी ने “पंच परिवर्तन” विषय पर अत्यंत सारगर्भित, वैचारिक एवं प्रेरणादायी बौद्धिक उद्बोधन दिया। उनके ओजस्वी विचारों ने उपस्थित अधिकारी–कर्मचारियों, पेंशनर्स एवं सामाजिक प्रतिनिधियों को आत्ममंथन एवं सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित किया।
अपने उद्बोधन में अभयराम जी ने कहा कि समाज और राष्ट्र के समग्र विकास के लिए केवल नीतियाँ और योजनाएँ पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के आचरण, विचार और व्यवहार में परिवर्तन आवश्यक है। इसी उद्देश्य को लेकर “पंच परिवर्तन” की अवधारणा प्रस्तुत की गई है, जो व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सशक्त मार्ग प्रशस्त करती है।
उन्होंने कुटुंब प्रबोधन विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परिवार भारतीय संस्कृति की मूल इकाई है। सुसंस्कारित, संस्कारी एवं सुदृढ़ परिवार ही सशक्त समाज की नींव रखते हैं। उन्होंने पारिवारिक संवाद, वरिष्ठों के सम्मान, बच्चों में नैतिक मूल्यों के संस्कार और पारिवारिक उत्तरदायित्व के निर्वहन पर विशेष बल दिया।
सामाजिक समरसता पर विचार रखते हुए प्रांत प्रचारक ने कहा कि जाति, वर्ग, भाषा एवं क्षेत्र के भेदभाव से ऊपर उठकर समरस समाज का निर्माण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समरसता केवल सह-अस्तित्व नहीं, बल्कि परस्पर सम्मान, सहयोग और संवेदनशीलता का भाव है, जिससे सामाजिक एकता और राष्ट्रीय अखंडता सुदृढ़ होती है।
पर्यावरण संरक्षण विषय पर अभयराम जी ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए व्यक्तिगत जीवनशैली में बदलाव आवश्यक है। उन्होंने वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक के सीमित उपयोग और स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
स्वदेशी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि स्वदेशी केवल आर्थिक नीति नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत का आधार है। स्थानीय उत्पादों के उपयोग से न केवल देश की अर्थव्यवस्था सशक्त होती है, बल्कि रोजगार के अवसर भी सृजित होते हैं। उन्होंने कर्मचारियों एवं नागरिकों से दैनिक जीवन में स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का आग्रह किया।
अपने उद्बोधन के अंतिम चरण में नागरिक कर्तव्यबोध पर प्रकाश डालते हुए अभयराम जी ने कहा कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों का संतुलन ही सशक्त लोकतंत्र की पहचान है। संविधान के प्रति सम्मान, नियमों का पालन, ईमानदारी, अनुशासन और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है। उन्होंने विशेष रूप से शासकीय कर्मचारियों से अपने दायित्वों का निर्वहन निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनसेवा की भावना से करने का आह्वान किया।
प्रांत प्रचारक अभयराम जी का यह बौद्धिक उद्बोधन अधिवेशन के समापन सत्र का प्रमुख आकर्षण रहा। उपस्थित प्रतिनिधियों ने इसे अत्यंत प्रेरक, मार्गदर्शक एवं राष्ट्र निर्माण की दिशा में दिशा-सूचक बताया। कार्यक्रम के अंत में संघ पदाधिकारियों ने उनके प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “पंच परिवर्तन” के विचार संगठनात्मक एवं सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा देंगे।


















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