भक्ति में उम्र और परिस्थिति बाधक नही होती - पं० नवीन पाठक
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
जांजगीर चाम्पा - समीपस्थ गौरव ग्राम सिवनी (नैला) में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक पंडित नवीन पाठक ने आज बड़े ही सुंदर भाव से ध्रुव चरित्र , जड़ भरत चरित्र , अजामिल उपाख्यान , प्रहलाद चरित्र सभी भक्तो को श्रवण कराया। महाराजजी ने श्रोताओं को भगवान के प्राकट्य की कथा के पहले भक्तो के दिव्य चरित्र को सुनाया। महाराजजी ने बताया कि भक्तो के चरित्र को सुनकर हम भगवद भक्ति मार्ग का अनुसरण और अनुकरण करके हम भी एक अच्छे भक्त बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि भक्ति में ना उम्र की सीमा होती और ना ही कोई परिस्थिति बाधक होती है। ध्रुव जी महाराज ने बाल्य अवस्था में ही भगवान का दर्शन प्राप्त कर लिया था , अजामिल ने केवल भगवान के नाम का आश्रय लेकर ही बैकुंठ प्राप्त कर लिया , प्रहलादजी ने विपत्ति आने पर भगवान की भक्ति नही छोड़ी और भगवान के ऊपर विश्वास करके ही भगवान को प्राप्त कर लिया। महाराजजी ने बताया कि सेवा रूपी पुष्प और विश्वास रूपी मंत्र का आश्रय लेकर ही भगवान को प्राप्त किया जा सकता है। जो भगवान के सच्चे भक्त होते हैं वो कभी भी भगवान की भक्ति बीच में नही छोड़ते। भक्तो के जीवन में जो विपत्ति और परेशानी होती है , वो भक्तो के भगवान के ऊपर विश्वास की परीक्षा होती है। इसलिये कभी भी विपत्ति और परेशानी से घबराना नहीं चाहिये बल्कि भक्ति को और ज्यादा पुष्ट करना चाहिये।


















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