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Tuesday, January 27, 2026

दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल मे राजस्व भूमि पर शासकीय कर्मचारियों का अतिक्रमण, विभाग मौन। किरंदुल सीएमओ और पटवारी बने रियल एस्टेट कारोबारी?

 ब्रेकिंग किरंदुल

लोकेशन दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़

रिपोर्टर..असीम पाल ब्यूरो

            दंतेवाड़ा


दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल मे राजस्व भूमि पर  शासकीय कर्मचारियों का अतिक्रमण, विभाग मौन।



किरंदुल सीएमओ और पटवारी बने रियल एस्टेट कारोबारी?


किरंदुल, 27 जनवरी 2026: 




किरंदुल नगर पालिका परिसर से सटी राजस्व भूमि पर शासकीय कर्मचारी द्वारा धड़ल्ले से अतिक्रमण हो रहा है। इसमें नगर पालिका के एक अधीक्षण अभियंता भूतपूर्व कर्मचारी भी शामिल हैं, जिसकी पुष्टि सीएमओ शशिभूषण ने स्वीकार की है।स्थानीय निवासियों का आरोप है कि किरंदुल पालिका परिसर से लगी पानी टंकी के निकट व गांधी नगर में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं।




 जिसमें नगरपालिका किरंदुल व शासकीय पटवारी भी शामिल हैं। किरंदुल सीएमओ ने मामला राजस्व विभाग पर डाल दिया, जबकि अनुविभागीय राजस्व अधिकारी विवेक चंद्रा ने प्रथम जानकारी के बाद पालिका से विवरण मांगने का आश्वासन दिया। परंतु पुनः संपर्क पर उन्होंने न तो उत्तर दिया और न ही फोन ग्रहण किया।


दोहरा मापदंड उजागर

आम नागरिकों के छोटे अतिक्रमण पर पालिका व राजस्व विभाग तत्काल बुलडोजर चला देते हैं, किंतु शासकीय कर्मचारीयो व रसूखदारों के कब्जे पर पूर्ण मौन धारण कर लिया जाता है। गांधी नगर व एनएमडीसी क्षेत्र की खाली भूमियां भी इसी तरह कब्जा सत्य होने का दावा किया जा रहा है। प्रशासनिक उदासीनता संविधान के अनुच्छेद 14 के समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है।संवैधानिक व विधिक प्रावधान

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 300-ए निजी संपत्ति के अधिकार की रक्षा करता है, किंतु शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा निषिद्ध है। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के अंतर्गत अतिक्रमण पर तहसीलदार द्वारा बेदखली, प्रतिदिन 500-2000 रुपये जुर्माना तथा निर्माण हटाने का प्रावधान है। मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता (जिसका छत्तीसगढ़ पर लागू) धारा 257 में भी तत्काल कार्रवाई का आदेश है। उच्चतम न्यायालय ने इंदौर विकास प्राधिकरण बनाम मनोहर लाल (2020) में स्पष्ट किया कि शासकीय भूमि अतिक्रमण को 50 वर्ष पुराना होने पर भी मान्यता नहीं दी जा सकती।


जिला प्रशासन की चुप्पी?

निवासी प्रश्न उठा रहे हैं कि क्या जिला कलेक्टर को किरंदुल-बचेली की शासकीय भूमियों पर हो रहे कब्जों की जानकारी है? एनएमडीसी क्षेत्र में बाउंड्री वाल क्यों नहीं बनाई जा रही? प्रशासन यदि बंदरबांट में भागीदार है तो लोकायुक्त जांच आवश्यक है। जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग उठ रही है, अन्यथा रसूखदारों का अतिक्रमण जारी रहेगा।

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