शंकराचार्यजी के अपमान से काशी हुई आक्रोशित
संन्यासियों ने समर्थन में किया सांकेतिक उपवास
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
वाराणसी - प्रयाग माघ मेला क्षेत्र में मौनी अमावस्या के दिन परमाराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वतीजी महाराज को माघ मेला क्षेत्र में प्रशासन द्वारा स्नान करने से रोकने व संतों सहित बटुकों के साथ प्रशासन द्वारा किये गये दुर्व्यवहार के विरोध में आज काशी में असि स्थित मुमुक्ष भवन में आज दंडी संन्यासियों ने सांकेतिक उपवास करके शंकराचार्यजी महाराज का समर्थन किया और दोषी जनों पर कार्यवाही की मांग की। इसके साथ ही मांग की कि शासन शंकराचार्यजी महाराज से खेद व्यक्त करते हुये उनके स्नान की परंपरागत व्यवस्था करे। ज्ञातव्य है कि कल प्रयाग माघमेला क्षेत्र में शंकराचार्यजी महाराज पालकी से स्नान करने जा रहे थे। उस समय प्रशासन ने उनके पालकी को रोक दिया और अनेकों तरह से रुकावट पैदा की। जब प्रशासन द्वारा संतों संग दुर्व्यवहार से रूष्ट शंकराचार्यजी महाराज वापस अपने शिविर जाने हेतु वापस जाने हेतु मुड़ रहे थे , उस समय अधिकारियों ने संतों व बटुकों को धक्का देकर गिराना और दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया। कुछ संतों को शिखा से पकड़कर घसीटा गया और शंकराचार्यजी महाराज की पालकी को अज्ञात लोगों ने खींचकर एक किलोमीटर दूर कर दिया। जिसके बाद शंकराचार्यजी महाराज अपने शिविर लौट गये और तब से लेकर अब तक शंकराचार्यजी महाराज अपने शिविर के बाहर अन्न जल त्यागकर धरने पर बैठे हुये हैं। उपवास स्थल पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुये शंकराचार्यजी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने कहा कि सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु सचल शिव शंकराचार्यजी महाराज के अपमान से समस्त सनातनधर्मी मर्माहत हैं।सदैव से परम्परा है कि शंकराचार्यजी महाराज लोगों को प्रशासन आदर सहित स्नान कराने ले जाता है जिसके के तमाम साक्ष्य मौजूद हैं। अगर प्रशासन स्नान नही करा सका तो कोई बात नही लेकिन उन्हें शंकराचार्यजी महाराज का अपमान और संतों संग दुर्व्यवहार नही करना चाहिये था।


















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