बुजुर्गों का अनुभव समाज की अमूल्य धरोहर - डॉ० रूपेन्द्र कवि
"अपनों के नाम पत्र" के साथ मनाया जन्मोत्सव
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर - शकुंतला फाउंडेशन द्वारा वरिष्ठजनों के हितार्थ एक अभिनव एवं अनूठे आयोजन “अपनों के नाम पत्र” का सफल आयोजन किया गया। डिजिटल युग में विलुप्त होती पत्र लेखन परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। फाउंडेशन की अध्यक्ष स्मिता सिंह ने बताया कि आज के दौर में भावनाओं की अभिव्यक्ति मोबाइल संदेशों तक सीमित हो गई है , जबकि हस्तलिखित पत्र आत्मीयता और संस्कारों का जीवंत दस्तावेज होते हैं। इस विशेष अवसर पर प्रख्यात मानवविज्ञानी , साहित्यकार एवं परोपकारी तथा छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के डिप्टी सेक्रेटरी डॉ. रूपेन्द्र कवि ने अपना जन्मोत्सव वरिष्ठजनों के स्नेहिल आशीर्वाद के साथ मनाया। वे अपने परिवार सहित कार्यक्रम में उपस्थित रहे। अपने उद्बोधन में डॉ. कवि ने बुजुर्गों के अनुभव को समाज की अमूल्य धरोहर बताते हुये सभी वरिष्ठजनों एवं फाउंडेशन की संस्थापक श्रद्धेय शकुंतला देवी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने “अपनों के नाम पत्र” की संकल्पना को विशेष रूप से सराहा और इसे भविष्य में पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने की सलाह देते हुये हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया , ताकि वरिष्ठजनों की भावनायें और जीवनानुभव स्थायी रूप से संरक्षित किये जा सकें। इस हर्षोल्लास के अवसर पर डॉ. कवि की धर्मपत्नी , समाजसेविका एवं लेखिका मोनिका कवि ने सभी उपस्थित वरिष्ठजनों को फल एवं नाश्ते का वितरण करते हुये हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में शकुंतला देवी , माधुरी शुक्ला , महेश दुबे , सुषमा बग्गा , पद्मा घोष , सुधा दीक्षित , स्मिता सिंह , मोनिका कवि ,साहू सर एवं अमिता अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। यह आयोजन वरिष्ठजनों के सम्मान , संवाद और संवेदना को समर्पित एक भावनात्मक पर्व सिद्ध हुआ , जिसने पत्र लेखन की परंपरा को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की।


















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