भगवान का अवतार होता है भक्तों को तारने के लिए - तारेंद्र कृष्ण महाराज
तिल्दा नेवरा = तिल्दा मिशन वार्ड क्रमांक 21 में चल रहे श्री शिव महापुराण कथा महोत्सव में द्वितीय दिवस में महाराज जी ने बताया कि किस प्रकार से शिव महापुराण की उत्पत्ति हुई और शिव महापुराण सकल विवादों को निराकरण करते हुए अपने भक्तों को उत्तम फल प्रदान करने के लिए इस धरा धाम में आकर के सभी शिव भक्त की कामना को भगवान पूरा कर रहे हैं महाराज श्री ने बताया कि किस प्रकार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु का युद्ध हुआ और उसे काल में भगवान पहली बार अग्नि स्तंभ शिवलिंग रूप पर प्रकट हुए हमारे शास्त्र में शिवलिंग की उत्पत्ति उस काल से जब पृथ्वी की उत्पत्ति ही नहीं हुई थी तब से भगवान महादेव का शिवलिंग विद्यमान है भगवान महादेव नारायण व ब्रह्मा के सामने पर बिना आकर के रूप में अग्नि स्तंभ के रूप में दर्शन दिए इसीलिए भगवान शिव को ओमकार कहा जाता है ओमकार का अर्थ यह है जिसका कोई आकर ही ना हो भगवान महादेव निराकार है ना इसका आदी है ना इसका अंत है भगवान महादेव की आखिरी चोर को नापने के लिए ऊपर से भगवान ब्रह्मा हंस के रूप पर गए वह नीचे से भगवान नारायण सुकर का रूप बनाकर के गये इसके बाद भी दोनों को आदि मिला न अंत मिला लेकिन भगवान ब्रह्मा छल करते हुए केकती के पुष्प लाकर के भगवान विष्णु को कहे कि मैं भगवान महादेव के शिस से केकती के पुष्प को लेकर आया हूं भगवान नारायण ब्रह्मा के बातों को सही जान करके शरणागति स्वीकार किया लेकिन भगवान महादेव को अन्याय अप्रिय है
सो भगवान शिव ब्रह्मा को फटकारते हुए उनको श्रापित किया कि आज के बाद आपका पूजा पृथ्वी पर नहीं होगा वह केकती पुष्प को श्रापित करते हुए कहा कि आज के बाद मेरे पूजा में तुम वंचित रहोगी ।
जिस प्रकार माता जानकी ने गया श्राद्ध करते हुए ब्राह्मण गौ फल्गु नदी को श्राप दिया क्योंकि यह भगवान राम के सामने पर झूठी गवाही दिए महादेव भी केकती को श्राप प्रदान किया भगवान महादेव ने भगवान विष्णु को आशीर्वाद देते हुए कहा कि भगवान नारायण आज के बाद आपका पूजा मेरे ही समान पृथ्वी पर किया जाएगा इसलिए आज भी अगर देखा जाए भगवान विष्णु का भगवान शिव का पूजा अनवरत होता है लेकिन भगवान ब्रह्मा का पूजा ब्रह्मा का मंदिर कहीं पर नहीं पाया जाता कि भगवान शिव का श्राप आज भी विद्यमान है महाराज जी ने कहा कि पुष्कर क्षेत्र में एक ही भगवान ब्रह्मा का मंदिर है क्योंकि पुष्कर क्षेत्र में भगवान ब्रह्मा बैठ करके सृष्टि का विस्तार किए थे शृष्टि आरंभ करने के कारण से पुष्कर में भगवान ब्रह्मा का मंदिर पाया जाता है वह यज्ञ काल में हवन करने के पहले भगवान ब्रह्मा का पूजा होता है बाकी और कहीं पर भगवान ब्रह्मा का पूजा नहीं किया जाता भगवान महादेव अपने भक्तों को दर्शन देकर के नारायण और ब्रह्मा को शिवलिंग प्रदान करके अंतर ध्यान हुए जैसे जीव भगवान महादेव का पूजा करते हैं शिवलिंग पर दूध जल पंचामृत अभिषेक करते हैं इस प्रकार से बैकुंठ में ब्रह्म लोक में ।
भगवान नारायण ब्रह्मा भी पूजा करते हैं इस प्रकार से महाराज जी ने बताया कि कलयुग में पार्थिव शिवलिंग का पूजा का विशेष महत्व है और
भगवान महादेव अपने भक्तों के लिए हर अवतार में आते हैं बताया गया कि विश्व मोहिनी को देखकर के भगवान महादेव का तेज इसखलीत हुआ सप्त महात्माओं ने उस तेज को एक पत्ते पर रख करके बहुत काल के बाद गौतम की कन्या अंजना के कानों से डाला गया और उससे ही भगवान शिव जी के 11वें रुद्र अवतार भगवान हनुमान जी का ् अवतार हुआ
कल शिव महापुराण में हनुमान जी और माता भगवती का विशेष झांकी दिखाया गया जिसके दर्शन करके समस्त मोहल्ला वासी कृत कृत्य हो गए
CNI NEWS से अजय नेताम की रिपोर्ट


















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