तिल्दा-नेवरा में बसें रुकती हैं, लेकिन यात्रियों के लिए छांव तक नहीं — आखिर किसकी जिम्मेदारी?
तिल्दा-नेवरा । राजधानी रायपुर के तिल्दा-नेवरा में वर्षों से बसें एक निर्धारित स्थान पर रुक रही हैं, जहां प्रतिदिन सैकड़ों यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए बसों का इंतजार करते हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय के बाद भी यहां यात्रियों के लिए बैठने या धूप-बारिश से बचने हेतु एक साधारण शेड तक की व्यवस्था नहीं हो पाई है।
धूप की तपिश हो, बारिश की मार हो या सर्द हवाएं—यात्रियों को हर मौसम में सड़क किनारे खड़े होकर ही बस का इंतजार करना पड़ता है। इस कारण बच्चे , महिलाएं, बुजुर्ग और मजदूर वर्ग को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार बुजुर्ग और महिलाएं थककर पास की दुकानों के सामने या जमीन पर बैठने को मजबूर हो जाते हैं, जो व्यवस्था की कमी को साफ दर्शाता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब वर्षों से बसें एक ही स्थान पर रुक रही हैं, तो वहां यात्रियों के लिए एक छोटा-सा यात्री प्रतीक्षालय या शेड बनवाना कोई बड़ी बात नहीं है। इसके बावजूद अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया है। इससे नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
लोगों का कहना है कि विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतों की अनदेखी की जा रही है। बस का इंतजार कर रहे यात्रियों के लिए छांव और बैठने की सुविधा जैसी छोटी व्यवस्था भी यदि उपलब्ध नहीं कराई जा सकती, तो विकास के दावों का क्या अर्थ रह जाता है।
नगरवासियों का मानना है कि प्रशासन को जल्द ही इस समस्या पर ध्यान देना चाहिए और संबंधित स्थान पर यात्री शेड का निर्माण कराना चाहिए, ताकि रोजाना सफर करने वाले लोगों को राहत मिल सके। अब देखना यह है कि तिल्दा-नेवरा की नगर पालिका जनता की इस मांग पर कब तक कार्रवाई करती है, या फिर यह मुद्दा भी केवल चर्चाओं और बैठकों तक ही सीमित रह जाएगा।
CNI NEWS तिल्दा नेवरा से अजय नेताम


















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