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Friday, March 27, 2026

विश्व रंगमंच दिवस आज-प्रदर्शन कलाओं में भागीदारी को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

 विश्व रंगमंच दिवस आज-प्रदर्शन कलाओं में भागीदारी को प्रोत्साहन देने के  उद्देश्य से मनाया जाता है।     




          सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।

विश्व रंगमंच दिवस 2026 -हर साल 27 मार्च को विश्व भर में विश्व रंग दिवस मनाया जाता है। यह अंतर्राष्ट्रीय दिवस रंगमंच कला के महत्व और समाज में इसकी भूमिका को बढ़ावा देता है। इसे  विश्व भर में 27 मार्च को  मनाया जाता है, विश्व रंगमंच दिवस, जो प्रदर्शन कलाओं का एक वैश्विक उत्सव है।



विश्व रंगमंच दिवस एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन है जो निम्नलिखित को समर्पित है:


विश्वभर में नाट्य कला को बढ़ावा देना


सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के बारे में जागरूकता बढ़ाना


•प्रदर्शन कलाओं में भागीदारी को प्रोत्साहित करना


यह अभिनेताओं, नाटककारों, निर्देशकों और दर्शकों को एक साथ लाता है।



विश्व रंगमंच दिवस   निम्नलिखित कारणों से मनाया जाता है:


• समाज में रंगमंच के महत्व को उजागर करें।


• रचनात्मकता और कहानी कहने को बढ़ावा दें।


• कलाकारों और थिएटर समुदायों का समर्थन करें ।


• सांस्कृतिक जागरूकता फैलाएं


रंगमंच मानवीय अभिव्यक्ति के सबसे प्राचीन रूपों में से एक है और पीढ़ियों को प्रेरित करता रहता है।


भारत में रंगमंच का इतिहास बहुत पुराना है। ऐसा समझा जाता है कि नाट्यकला का विकास सर्वप्रथम भारत में ही हुआ। ऋग्वेद के कतिपय सूत्रों में यम और यमी, पुरुरवा और उर्वशी आदि के कुछ संवाद हैं। इन संवादों में लोग नाटक के विकास का चिह्न पाते हैं। कहा जाता है कि इन्हीं संवादों से प्रेरणा ग्रहण कर लागों ने नाटक की रचना की और नाट्यकला का विकास हुआ। उसी समय भरतमुनि ने उसे शास्त्रीय रूप दिया। भारत मे जब रंगमंच की बात होती है तो ऐसा माना जाता है कि छत्तीसगढ़ में स्थित रामगढ़ के पहाड़ पर महाकवि कालीदास जी द्वारा निर्मित एक प्राचीनतम नाट्यशाला मौजूद है। कहा जाता है कि महाकवि कालिदास ने यहीं मेघदूत की रचना की थी। इस आधार पर यह भी कहा जाता है कि अम्बिकापुर जिले के रामगढ़ पहाड़ पर स्थित महाकवि कालिदास जी द्वारा निर्मित नाट्यशाला भारत का सबसे पहला नाट्यशाला है। बता दें कि रामगढ़ सरगुजा जिले के उदयपुर क्षेत्र में है,यह अम्बिकापुर-रायपुर हाइवे पर स्थित  है।

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