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Monday, March 23, 2026

लक्ष्मी पंचमी व्रत आज- यह पर्व धन , समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करने वाला पर्व है।

 लक्ष्मी पंचमी व्रत आज- यह पर्व धन , समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करने वाला पर्व है।        




               सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी 

लक्ष्मी पंचमी 2026 चैत्र नवरात्र और नव वर्ष की शुरुआत में आने वाला ऐसा दिवस है जिसे धन, समृद्धि और सौभाग्य की दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। वर्ष की शुरुआती सप्ताह में जब घर परिवार नए संकल्पों और योजनाओं के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में रहते हैं, उसी समय लक्ष्मी पंचमी साधक को यह अवसर देती है कि वह अपनी अर्थव्यवस्था, गृहस्थी और कर्मक्षेत्र को देवी महालक्ष्मी की कृपा के साथ जोड़कर नए सिरे से व्यवस्थित करे। इस दिन की सबसे विशेष बात यह है कि यह केवल धन प्राप्ति का पर्व नहीं बल्कि शुभारंभ, शुद्धता और  सत्कार्य की दिशा में उठाया गया एक सामूहिक कदम भी माना जाता है।


लक्ष्मी पंचमी की तिथि और पंचमी तिथि का समय-


लक्ष्मी पंचमी हमेशा चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। वैदिक समय विभाजन के अनुसार यह तिथि कल्पादि से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए इसे अत्यंत पवित्र आरंभिक काल माना गया है।


लक्ष्मी पंचमी 2026 सोमवार 23 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। पंचमी तिथि 22 मार्च की रात 09 बजकर 16 मिनट पर आरंभ होकर 23 मार्च की शाम 06 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। चूंकि 23 मार्च के दिन सूर्योदय से लेकर सायंकाल तक पंचमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए इसी दिन लक्ष्मी पंचमी व्रत, लक्ष्मी पूजा और विशेष अनुष्ठान करना शास्त्र सम्मत माना जाएगा।


लक्ष्मी पंचमी को केवल सामान्य पंचमी नहीं बल्कि कल्पादि तिथि माना गया है। वैदिक समय गणना में कल्प एक बहुत लंबी अवधि को कहा जाता है और इस दृष्टि से चैत्र शुक्ल पंचमी उस कल्प के आरंभ का सूचक मानी जाती है। इसलिए इस तिथि पर की गई पूजा को ब्रह्मांडीय स्तर पर शुभ आरंभ का प्रतीक माना गया है।


हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष भर में कुल सात कल्पादि दिन माने जाते हैं। इन सात कल्पादि दिनों में गुड़ी पड़वा या उगादि, अक्षय तृतीया और अन्य कुछ विशेष तिथियाँ शामिल हैं जो नए आरंभ, स्थायी शुभ फल और दीर्घकालिक समृद्धि से जुड़ी होती हैं। लक्ष्मी पंचमी इन्हीं सात विशेष कल्पादि दिनों में से एक है, इसलिए इसे वर्ष के महत्वपूर्ण आरंभिक पर्वों की श्रेणी में रखा गया है।


लक्ष्मी पंचमी का आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व


लक्ष्मी पंचमी का दिन हिंदू नव वर्ष के पहले सप्ताह में आता है, जब पूरा वर्ष अभी खुला हुआ भविष्य बनकर सामने होता है। ऐसे समय पर माता लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है, क्योंकि इससे नए वर्ष के लिए धन की गति, व्यापार की दिशा और गृहस्थ जीवन की स्थिरता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की मान्यता है।


इस दिन  घरों में एक दिन का व्रत रखा जाता है। गृहस्थ केवल घर में ही नहीं, बल्कि दुकान, कार्यालय और व्यापारिक प्रतिष्ठान में भी मां लक्ष्मी की विशेष पूजा करते हैं। कई व्यापारिक घराने इस दिन विस्तृत पूजा का आयोजन करते हैं, जिसमें लेखा पुस्तिकाओं, तिजोरी, व्यापार से जुड़ी वस्तुओं और पूरे संस्थान के लिए लक्ष्मी कृपा की प्रार्थना की जाती है। लक्ष्मी पंचमी उन परिवारों और व्यापारियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है जो वर्ष की शुरुआत को संगठित, अनुशासित और ईश्वर कृपा से युक्त भाव के साथ जीना चाहते हैं।


लक्ष्मी पंचमी की पूजा  कैसे करें


लक्ष्मी पंचमी की पूजा विधि सरल होते हुए भी अत्यंत अर्थपूर्ण है। भक्तों के लिए प्रमुख बिंदु यह हैं कि पूजा शुद्ध स्थान पर, स्वच्छ मन से और यथासंभव पंचमी तिथि के प्रभाव में की जाए।


लक्ष्मी पंचमी पर पूजा का क्रम इस प्रकार रखा जा सकता है-

 प्रातः स्नान कर स्वच्छ या हल्के पीले, गुलाबी या लाल रंग के वस्त्र धारण करें।


 घर, कार्यालय या दुकान में उत्तर या पूर्व दिशा की ओर देखकर मां लक्ष्मी की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें।


 सबसे पहले लक्ष्मी जी के स्तोत्र और मंत्रों का जप करें, जिससे मन एकाग्र हो और पूजा का वातावरण बन सके।


 इसके बाद मूर्ति को पंचामृत से शुद्ध किया जाता है। पंचामृत सामान्यतः दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बनाया जाता है। शोधन के बाद स्वच्छ जल से अभिषेक कर मूर्ति को पुनः आसन पर विराजमान किया जाता है।


  देवी को चंदन, केले के पत्ते, फूलों की माला, अक्षत, दूर्वा, लाल धागा, सुपारी और नारियल अर्पित किए जाते हैं। जहाँ संभव हो वहां श्रीयंत्र या लक्ष्मी की पदचिह्न प्रतिमा भी स्थापित की जा सकती है।


साधक लक्ष्मी स्तोत्र  मंत्रों से धन, धैर्य और सात्त्विक समृद्धि की विशेष प्रार्थना कर आराधना करें म


 पूजा के अंत में मां लक्ष्मी की आरती उतारें । इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं  और यथाशक्ति दक्षिणा देकर  विदा करें।


इस प्रकार लक्ष्मी पंचमी पर घर और कार्यस्थल दोनों स्थानों पर एक ही भाव से लक्ष्मी पूजा करना पूरे वर्ष के लिए संतुलित आर्थिक दृष्टि और नैतिक व्यावहारिकता का आधार बन सकता है।

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