21 माह से लंबित मनरेगा कर्मियों की HR पॉलिसी
नक्सलमुक्त बस्तर को चरितार्थ करने वाले यशश्वी उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री विजय शर्मा से 36 वें बार मिला छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ,
मानव संसाधन नीति लागू करने में हो रही देरी का मुद्दा उठा।
योजनाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले कर्मचारी आज भी सेवा सुरक्षा से वंचित
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
रायपुर छत्तीसगढ़-
राज्य में मनरेगा योजना को संचालित हुए लगभग दो दशक पूर्ण हो चुके हैं, किन्तु आज भी योजना के क्रियान्वयन की रीढ़ माने जाने वाले मनरेगा कर्मियों के लिए स्पष्ट मानव संसाधन (HR) नीति, सेवा सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा एवं भविष्य सुरक्षा जैसी मूलभूत व्यवस्थाएँ लागू नहीं हो सकी हैं।
सरकार गठन के पश्चात मनरेगा कर्मचारियों के लिए एक व्यवस्थित HR पॉलिसी तैयार करने हेतु समिति का गठन किया गया था, जिसे 15 दिवस के भीतर अपनी अनुशंसा प्रस्तुत करनी थी। आश्चर्यजनक रूप से 21 माह बीत जाने के बाद भी यह फाइल प्रशासनिक स्तर पर लंबित है, जिससे हजारों कर्मचारियों में गहरी निराशा व्याप्त है।
इसी गंभीर विषय को लेकर छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ की प्रांतीय एवं कवर्धा जिला इकाई ने माननीय उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री विजय शर्मा से मुलाकात कर मनरेगा कर्मियों के लिए HR पॉलिसी लागू करने में हो रही देरी का मुद्दा उठाया।
माननीय मंत्री जी के ठोस रणनीति एवं अटूट प्रयासों से 27 माह में नक्सल मुक्त बस्तर कि परिकल्पना साकार हुआ है वहीं पिछले 28 माह से लगातार मेल मुलाकात व 21 माह पूर्व समिति गठन उपरांत भी 12000 मनरेगा कर्मीयों की HR पॉलिसी की फ़ाइल मंत्रालय में धूल खा रही है, जिससे सेवा एवं सामाजिक सुरक्षा के बाट जोहते हुए कई कर्मी परलोक सुधार गए है।
महासंघ ने सरकार के समक्ष यह तथ्य प्रमुखता से रखा कि राज्य में मनरेगा एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में मनरेगा कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। कर्मचारियों के सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने मनरेगा एवं प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। राज्य ने एक ही वित्तीय वर्ष में लगभग 6 लाख प्रधानमंत्री आवास निर्माण पूर्ण कर देश में नया कीर्तिमान स्थापित किया, जो अब तक किसी भी राज्य द्वारा प्राप्त नहीं किया गया था।
महासंघ ने यह भी प्रश्न उठाया कि जब राज्य की अन्य संविदा आधारित योजनाओं — जैसे NHM, ICDS, NRLM— में कार्यरत कर्मचारियों के लिए राज्य स्तर पर HR पॉलिसी एवं सेवा सुरक्षा संबंधी प्रावधान लागू किए जा चुके हैं, तब मनरेगा जैसे देश के सबसे बड़े ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के कर्मचारियों को अब तक इस अधिकार से वंचित रखना प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है।
महासंघ ने स्पष्ट किया कि योजनाओं की सफलता का श्रेय लेने वाला प्रशासन यदि उन योजनाओं को जमीन पर क्रियान्वित करने वाले कर्मचारियों की सेवा एवं भविष्य सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता मानी जाएगी।
माननीय उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विषय की गंभीरता को स्वीकार करते हुए प्रकरण पर तत्काल संज्ञान लिया तथा अपने OSD एवं ACS को HR पॉलिसी संबंधी आवश्यक निर्देश प्रदान किए। साथ ही महासंघ की विगत दो वर्षों से लंबित सेवा सुरक्षा एवं भविष्य सुरक्षा संबंधी मांगों के शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया।
उक्त अवसर पर छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ से अजय सिंह क्षत्री, नरेंद्र टोंड्रे, अशोक कुर्रे, संजय काठले, मुकेश साहू, भेजलाल, लवकेश मरकाम, लोकेंद्र ठाकुर, अनिल वर्मा सहित बड़ी संख्या में कवर्धा जिले के साथी मौजूद रहे।


















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