सी एन आई न्यूज रिपोर्टर रमेश श्रीवास्तव पिथौरा 9977708864
बहुत फलदाई होता है पुरुषोत्तम मास की महाशिवरात्रि
पुरुषोत्तम मास, जिसे "अधिक मास" या "मलमास" भी कहते हैं, हर 3 साल में 1 बार आता है। इस महीने को भगवान विष्णु का महीना माना जाता है, लेकिन शिव भक्तों के लिए इस मास की महाशिवरात्रि का महत्व और भी बढ़ जाता है।
खास बातें:
1. फल कई गुना : मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में किया गया शिव पूजन, व्रत, रुद्राभिषेक का फल सामान्य महाशिवरात्रि से कई गुना अधिक मिलता है। इसे "अधिमास शिवरात्रि" भी कहते हैं।
2. पाप मुक्ति : इस दिन शिवजी की आराधना से जन्म-जन्मांतर के पाप कटते हैं। मान्यता है कि मलमास में शिवलिंग पर बेलपत्र, जल, दूध चढ़ाने से मोक्ष का मार्ग खुलता है।
3. मनोकामना पूर्ति : पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु का है, पर इस मास की शिवरात्रि पर शिव-पार्वती की पूजा करने से दोनों की कृपा मिलती है। खासकर विवाह, संतान और कर्ज मुक्ति की मनोकामना जल्दी पूरी होती है।
4. दान का महत्व : इस पूरे महीने दान, जप, तप का महत्व है। शिवरात्रि के दिन गरीबों को भोजन, वस्त्र, तिल-गुड़ दान करने से अक्षय पुण्य मिलता है।
पूजा विधि: रातभर जागरण, "ॐ नमः शिवाय" का जप, रुद्राष्टक/शिव चालीसा का पाठ, और शिवलिंग पर 108 बेलपत्र चढ़ाना सबसे शुभ माना जाता है।
इस साल पुरुषोत्तम मास 16 अगस्त 2026 से 14 सितंबर 2026 तक है। इस दौरान पड़ने वाली महाशिवरात्रि 31 अगस्त 2026, सोमवार को होगी।


















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