सूर्य पुत्र शनिदेव केवल भय या दंड के प्रतीक नहीं है, बल्कि वे धैर्य, अनुशासन और कर्म के महत्व को सिखाने वाले निष्पक्ष देवता हैं।
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी। शनि शिंगणापुर- न्याय के देवता शनिदेव हिंदू धर्म में कर्मफलदाता और सर्वोच्च न्यायाधीश के रूप में पूजे जाते हैं। वे मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार उचित दंड या पुरस्कार प्रदान करते हैं। न्याय के इस दिव्य प्रतीक शनि देव की पूजा जीवन में सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
शनिदेव सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं।
मृत्यु के देवता यमराज इनके भ्राता हैं और यमुना इनकी बहन हैं।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, शनि देव कठोर अनुशासक हैं। यमराज जहां मृत्यु के पश्चात जीवों को उनके कर्मों का दंड देते हैं, वहीं शनिदेव जीवित रहते हुए ही कर्मों का लेखा-जोखा तय करते हैं।
वे किसी के साथ पक्षपात नहीं करते। जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है, उसे उत्तम फल और जो बुरे कर्म करता है, उसे दंड अवश्य मिलता है।
शनिदेव की दृष्टि को लेकर लोगों में अक्सर भय रहता है, परंतु वास्तविकता में यह भय लोगों को गलत मार्ग पर जाने से रोकने के लिए है।
उनकी कृपा हो जाने पर रंक भी राजा बन सकता है। आज शनिदेव के दर्शन के लिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और महाराष्ट्र के अमरावती, नागपुर से आए श्रद्धालुओं ने शनिदेव के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।






















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