विभुवन संकष्टी व्रत का उद्यापन कर लिया गणेश जी का आशीर्वाद।
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
रायपुर -हिन्दू धर्म मानने वालों में कुछ ऐसे व्रत होते हैं जो चुपचाप आ जाते हैं, फिर भी मन को शांति और सुकून का एहसास कराते हैं। विभुवन संकष्टी चतुर्थी भी ऐसा ही एक व्रत है।
भगवान गणेश को समर्पित यह पवित्र व्रत का उद्यापन आज श्रीमती संगीता जोशी द्वारा अपने बुढ़ापारा स्थित निवास में किया गया। इस विशेष अवसर पर परिवार एवं समाज तथा अन्य महिलाओं को भोजन कराया।
हिंदू धर्म में मान्यता है प्रथम पूज्य गणपति जी की पूजा अर्चना करने से जीवन में स्थिरता,विचारों में स्पष्टता और धैर्य के साथ विलंब या भ्रम से निपटने की शक्ति मिलती हैं।
यह व्रत चंद्रमा के दर्शन होने के बाद ही पूर्ण होता है। रात के आकाश में चंद्रमा का दर्शन कर,जल अर्पित कर भगवान गणेश जी को नमन करते हुए आशीर्वाद लिया, और गणेश जी के प्रति आस्था,कृतज्ञता और आंतरिक शांति से जुड़ने की प्रार्थना की।
इस उद्यापन केअवसर पर शामिल रही, श्रीमती निर्मला जोशी, नर्मदा शर्मा, सुमन उपाध्याय, सुनीता जोशी, पुष्पा शर्मा, चेतना शर्मा, कंचन जोशी, सहित अन्य महिलाएं भोजन प्रसादी ग्रहण करी।
दिनेश जोशी ने कहा कि
संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित है, जिनकी पूजा बाधाओं को दूर करने वाले और ज्ञान, बुद्धि और शुभ आरंभ के देवता के रूप में की जाती है। संकष्टी शब्द का अर्थ ही कठिनाइयों और भावनात्मक बोझ से मुक्ति है, यह व्रत भगवान गणेश और चंद्रमा के बीच प्रतीकात्मक संबंध को भी दर्शाता है। परंपरा के अनुसार, चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित करने और भगवान गणेश की पूजा करने के बाद ही व्रत तोड़ा जाता है। यह व्रत भावनात्मक शांति और व्यावहारिक ज्ञान के बीच संतुलन का प्रतीक है।
चंद्रोदय के बाद, सभी ने चंद्रमा को जल अर्पित किया और भोजन प्रसादी ग्रहण कर व्रत का समापन किया ।
संकष्टी चतुर्थी को अक्सर मानसिक बेचैनी को शांत करने और एकाग्रता बढ़ाने से जोड़ा जाता है। भगवान गणेश बुद्धि, ज्ञान और निर्णय लेने की क्षमता से जुड़े हैं, जबकि चंद्रमा भावनाओं, भावनात्मक सुरक्षा और मानसिक संतुलन का प्रतीक है।
गणेश मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही।
मान्यता है कि ये प्रथाएं मानसिक स्पष्टता और भक्ति में एकाग्रता को बढ़ावा देती हैं।




















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