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Tuesday, July 28, 2026

दंतेवाड़ा जिले के बचेली मे एनएमडीसी स्लरी पाइपलाइन प्रोजेक्ट: बारिश में बैन के बावजूद धड़ल्ले से जारी है खुदाई, जानलेवा बने 10 फीट गहरे गड्ढे

 ब्रेकिंग दंतेवाड़ा

लोकेशन दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़

रिपोर्टर   असीम पाल

             दंतेवाड़ा


दंतेवाड़ा जिले के बचेली मे एनएमडीसी स्लरी पाइपलाइन प्रोजेक्ट: बारिश में बैन के बावजूद धड़ल्ले से जारी है खुदाई, जानलेवा बने 10 फीट गहरे गड्ढे



दंतेवाड़ा। बचेली

स्टील प्लांट तक कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति के लिए एनएमडीसी द्वारा बचेली से नगरनार तक 138 किलोमीटर लंबी स्लरी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। लगभग ₹2,900 से ₹3,500 करोड़ का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट प्रशासनिक लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी के कारण आम लोगों और किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है।

मानसून के दौरान निर्माण और खुदाई कार्यों पर शासन-प्रशासन की रोक के बावजूद नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बारिश के बीच पोकलेन मशीनों से धड़ल्ले से खुदाई की जा रही है।

जानलेवा तालाब बने गड्ढे, हादसों का डर

नेरली और कमेली समेत कई इलाकों में पाइपलाइन बिछाने के लिए करीब 10-10 फीट गहरे गड्ढे खोदे गए हैं। बारिश के पानी से भरे ये गड्ढे अब जानलेवा तालाब का रूप ले चुके हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि ठेकेदारों द्वारा इन खतरनाक गड्ढों के आसपास: न तो सुरक्षा घेरा (बैरिकेडिंग) लगाया गया है, न ही कोई रिफ्लेक्टर या रेड टेप जैसी चेतावनी संकेत दिए गए हैं।

पिछली घटनाओं से भी नहीं लिया सबक: उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष मानसून के दौरान गीदम और भांसी क्षेत्र में इसी तरह के खुले गड्ढों में गिरने से दो मासूम बच्चों की जान चली गई थी। इस हादसे के बाद प्रशासन ने जून से सितंबर तक बारिश के मौसम में खुदाई पर सख्त अल्टीमेटम जारी किया था, लेकिन इस बार भी नियमों को दरकिनार कर काम जारी है।

बदहाल हुए खेत, किसान बुआई से वंचित

यह पाइपलाइन दंतेवाड़ा जिले के दर्जनों किसानों के खेतों से होकर गुजर रही है। जमीन अधिग्रहण के बाद निर्माण कार्य तो किया गया, लेकिन काम खत्म होने के बाद खेतों की सुध नहीं ली गई:

दलदल में तब्दील जमीन: पाइपलाइन डालने के बाद भरी गई मिट्टी धंस चुकी है, जिससे खेत दलदल बन गए हैं।

 मवेशियों पर खतरा: खेतों में मवेशी जाकर फंस रहे हैं।

 खेती ठप: खेतों की बदतर स्थिति के कारण इस वर्ष अधिकांश किसान अपनी धान की बुआई तक नहीं कर पाए हैं।

प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग: मुआवजे के बावजूद खेतों को खेती-योग्य न बनाए जाने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी से प्रभावित किसानों और स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेकर अवैध खुदाई रोकने और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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