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लोकेशन दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़
रिपोर्टर। असीम पाल ब्यूरो
दंतेवाड़ा
दंतेवाड़ा जिले में ताक पर नियम, कंक्रीट-सरिया की चोरी: बचेली-किरंदुल मार्ग पर लोक निर्माण विभाग के सड़क चौड़ीकरण में बड़े पैमाने पर धांधली
बचेली।दंतेवाड़ा।
लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत एन सी,नाहर कंस्ट्रक्शन द्वारा बचेली-किरंदुल घाट में चल रहे सड़क चौड़ीकरण और साइड निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। शासन की मंशा और जनसुविधा को ताक पर रखकर ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य में गुणवत्ता से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी और मौके के निरीक्षण के अनुसार, सड़क किनारे कंक्रीट और रॉड (सरिया) के इस्तेमाल में स्वीकृत कार्य आदेश (Work Order) और एस्टीमेट के मानकों का रत्ती भर भी पालन नहीं किया जा रहा है। निर्माण सामग्री में बड़े पैमाने पर चोरी और लीपापोती कर गुणवत्ता को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।
बिना पर्यवेक्षण चल रहा काम, अधिकारी साधे हैं चुप्पी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शासकीय नियमों के मुताबिक किसी भी लोक निर्माण कार्य के दौरान विभागीय सब-इंजीनियर (Sub-Engineer) या कम से कम विभागीय चौकीदार/मेट का मौके पर मौजूद रहना अनिवार्य होता है। परंतु इस मार्ग पर कार्यस्थल से विभागीय अमला पूरी तरह नदारद है।
जिम्मेदार अधिकारियों की गैरमौजूदगी का पूरा फायदा उठाते हुए ठेकेदार और उसके सुपरवाइजर मनमाने ढर्रे पर घटिया निर्माण को अंजाम दे रहे हैं।
मिलीभगत का आरोप, शासन की राशि का दुरुपयोग
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इस पूरे मामले की जानकारी संबंधित विभागीय अधिकारियों को भली-भांति है। अधिकारियों की मूक सहमति और संरक्षण के बिना इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी संभव नहीं है। साफ तौर पर यह शासन के राजस्व और सार्वजनिक धन का खुला दुरुपयोग है, जहां ठेकेदार और विभागीय साठगांठ से गुणवत्ताहीन ढांचा खड़ा किया जा रहा है।
सवाल जो प्रशासन से जवाब मांगते हैं:
1. क्या कार्य आदेश के अनुसार बेस, कंक्रीट रेश्यो और सरिया की गुणवत्ता की जांच की गई?
2. कार्यस्थल पर विभागीय तकनीकी अमला (अनुविभागीय अधिकारी//सब इंजीनियर) अनुपस्थित क्यों रहते है?
3. क्या घटिया निर्माण की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कर इसे ध्वस्त कराकर पुन: गुणवत्तापूर्ण कार्य कराया जाएगा?
देखना होगा कि यह खबर प्रमुखता से उजागर होने के बाद जिला प्रशासन और लोक निर्माण के उच्चाधिकारी इस फर्जीवाड़े पर क्या दंडात्मक कार्रवाई करते हैं, या फिर कागजी खानापूर्ति कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।


















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