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Friday, July 17, 2026

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026, चिरमिरी: अभाविप ने सेवा, संस्कार और सामाजिक समर्पण की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की

 जगन्नाथ रथ यात्रा 2026, चिरमिरी: अभाविप ने सेवा, संस्कार और सामाजिक समर्पण की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की



चिरमिरी। भगवान श्रीजगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा 2026 श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक उल्लास के वातावरण में संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के कार्यकर्ताओं ने सेवा, संस्कार, अनुशासन और सामाजिक समर्पण का परिचय देते हुए विभिन्न सेवा कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाई। 




परिषद के कार्यकर्ताओं ने यह संदेश दिया कि विद्यार्थी शक्ति केवल शैक्षणिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने में भी सदैव अग्रणी रहती है।


रथ यात्रा के दौरान अभाविप कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं के लिए पेयजल वितरण, प्रसाद वितरण, यात्रा मार्ग पर सहयोग, भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता व्यवस्था तथा आवश्यकतानुसार विभिन्न सेवा कार्यों में अपना योगदान दिया। पूरे आयोजन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अनुशासन, संयम और सेवा भाव के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। सेवा कार्यों के माध्यम से परिषद ने भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र "नर सेवा ही नारायण सेवा" को व्यवहार में उतारने का प्रयास किया।


भगवान श्रीजगन्नाथ की रथ यात्रा भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा का प्रतीक है, जो समाज में समरसता, समानता, सहयोग और लोककल्याण का संदेश देती है। ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में युवाओं की सहभागिता उन्हें अपनी गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा भी देती है। अभाविप का विश्वास है कि सेवा और संस्कार से ही सशक्त समाज तथा विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है।


अभाविप निरंतर "ज्ञान-शील-एकता" के मूल मंत्र तथा "छात्र शक्ति – राष्ट्र शक्ति" के विचार को आत्मसात करते हुए विद्यार्थियों में सेवा, नेतृत्व, सामाजिक चेतना और राष्ट्रभक्ति के संस्कार विकसित करने का कार्य कर रही है। परिषद शिक्षा के साथ-साथ समाज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाने के उद्देश्य से विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रहित के कार्यक्रमों का आयोजन करती रहती है।


रथ यात्रा के अवसर पर किए गए सेवा कार्यों के माध्यम से अभाविप ने यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति का वास्तविक स्वरूप केवल परंपराओं के पालन में नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक सहयोग, संवेदना और सेवा पहुँचाने में निहित है। जब युवा निस्वार्थ भाव से समाजहित में कार्य करते हैं, तब राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया और अधिक सशक्त होती है।


अभाविप ने सभी श्रद्धालुओं, आयोजन समिति, स्थानीय प्रशासन एवं नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की सहभागिता और सहयोग से ही ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन सफल बनते हैं। परिषद ने संकल्प व्यक्त किया कि भविष्य में भी वह सेवा, संस्कार और संगठन के मूल्यों को लेकर समाजहित एवं राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाती रहेगी तथा युवाओं को राष्ट्र निर्माण के अभियान से जोड़ने का कार्य निरंतर जारी रखेगी।

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