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Sunday, July 5, 2026

छत्तीसगढ़ की लोककला की स्वर-सम्राज्ञी तीजन बाई को भावपूर्ण श्रद्धांजलि

 छत्तीसगढ़ की लोककला की स्वर-सम्राज्ञी तीजन बाई को भावपूर्ण श्रद्धांजलि




छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और पंडवानी कला को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने वाली महान लोककलाकार एवं पद्म विभूषण सम्मानित पंडवानी गायिका तीजन बाई का 5 जुलाई 2026 को निधन हो गया।




 उनके निधन की खबर से पूरे छत्तीसगढ़ सहित देश-विदेश के कला प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है। लोककला जगत ने एक ऐसी विभूति को खो दिया है, जिसकी भरपाई आने वाले वर्षों में संभव नहीं दिखती।




8 अगस्त 1956 को जन्मी तीजन बाई ने अपने अद्वितीय गायन, दमदार अभिनय और प्रभावशाली मंच प्रस्तुति के माध्यम से महाभारत की कथाओं को जन-जन तक पहुँचाया। उन्होंने पंडवानी जैसी पारंपरिक लोककला को केवल गांवों और मेलों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया।




तीजन बाई की पहचान केवल एक गायिका के रूप में नहीं थी, बल्कि वे लोकसंस्कृति की सशक्त दूत थीं। उनकी आवाज़ में ऐसा जादू था कि श्रोता महाभारत के पात्रों और घटनाओं को अपने सामने जीवंत महसूस करते थे। अपनी विशिष्ट शैली, आत्मविश्वास और कला के प्रति समर्पण के कारण उन्होंने देश-दुनिया में लाखों प्रशंसक बनाए।




सम्मान और उपलब्धियां

लोककला के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। प्रमुख सम्मान इस प्रकार हैं—

पद्म श्री – 1988

संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार – 1992

पद्म भूषण – 2003

छत्तीसगढ़ रत्न – 2018

पद्म विभूषण – 2019

कबीर सम्मान – 2022

इन सम्मानों ने न केवल उनकी कला का सम्मान किया, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

कला जगत में अपूरणीय क्षति




तीजन बाई का निधन लोककला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके द्वारा प्रस्तुत पंडवानी की शैली आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उन्होंने संघर्षों से भरे जीवन में अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर जो मुकाम हासिल किया, वह हर कलाकार के लिए प्रेरणादायक है।

कला प्रेमियों का कहना है कि तीजन बाई ने अपने जीवन को लोककला के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित कर दिया। उनकी सरलता, सहजता और लोकसंस्कृति के प्रति समर्पण सदैव याद किया जाएगा।

आज भले ही तीजन बाई हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज़, उनकी कला और उनकी अमर प्रस्तुतियाँ हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी। छत्तीसगढ़ की यह महान लोकगायिका सदैव अपनी कला के माध्यम से अमर रहेंगी।

भावपूर्ण श्रद्धांजलि। 🕯️🙏

रिपोर्ट: दिलीप सोनवानी | CNI NEWS बिलासपुर

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