पामगढ़ के डोंगाकोहरौद में सडक को लेकर ग्रामीणों ने किया चक्काजाम,
भारी बारिश में सड़क के लिए आंदोलन
15 साल से जर्जर सड़क के निर्माण के लिए गांव के युवक 5 दिन से आमरण अनशन में हैं.
जांजगीर चांपा: पामगढ़ में डोंगाकोहरौद के लोगों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर चक्काजाम कर दिया. सुबह 10 बजे से महिला पुरुष और युवाओं ने बिलासपुर शिवरीनारायण मार्ग को जाम कर दिया. ग्रामीणों के इस आंदोलन को समाप्त कराने के लिए जिला प्रशासन समझाइश देने में जुटी रही, लेकिन आंदोलनकारी सड़क की प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद ही आंदोलन समाप्त करने पर अड़े रहे.
मुआवजा के लिए कोर्ट गए
जांजगीर चांपा जिला के पामगढ़ नगर पंचायत से डोंगाकोहरौद होते हुए लाहौद को जोड़ने के लिए सड़क निर्माण का काम होना है. इसके लिए साल 2017-18 में छत्तीसगढ़ रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन द्वारा 30 किलोमीटर की सड़क को 76 करोड़ रुपये में बनाना था, लेकिन डोंगाकोहरौद में जमीन मुआवजा के कारण जमीन मालिकों ने हाईकोर्ट की शरण ली.
कोर्ट से भी राज्य शासन को भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के बाद ही सड़क निर्माण का आदेश दिया गया, लेकिन राज्य सरकार ने डोंगाकोहरौद गांव के अंदर सड़क की चौडाई कर 2.7 मीटर चौड़ी सड़क का प्रस्ताव बनाया और पुरानी सड़क में 64 ग्रामीणों की सहमति से सड़क बनाने का प्रस्ताव रखा.
भारी बारिश में सड़क के लिए आंदोलन
30 जून से आमरण अनशन
सड़क निर्माण से अधिक राशि, मुआवजा में जाने की स्थिति में ठेकेदार ने काम रोक दिया और तब से सड़क का काम रुका है. अब ग्रामीणों को बड़े बड़े गड्ढों से भरी सड़क में रोजाना आना जाना पड़ता है और दुर्घटना का शिकार होना पड़ रहा है, जिससे तंग आकर पूरे गांव वाले एक जुट हुए और 30 जून से 10 युवाओं ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू कर दिया.
ग्रामीणों का आक्रोश
आमरण अनशन पर बैठने के बाद भी शासन प्रशासन से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने चक्का जाम कर दिया. ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से सड़क निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति देने की मांग की है.
चक्काजाम के बाद अधिकारी बातचीत करने पहुंचे. 15 साल से काम अटका है. मरम्मत का आश्वासन हमेशा से मिलता रहा है, अगर स्वीकृति मिलेगी तभी आंदोलन समाप्त होगा-पंकज कौशिक, आमरण अनशन में बैठे युवक
जब हमारी मातृ शक्ति और गांव के लोगों ने चक्काजाम किया, तब अधिकारी पहुंचे. हमारी स्वीकृति की मांग है, रिपेयरिंग कोई सॉल्यूशन नहीं है. कई बार आश्वासन मिला है, जमीनी स्तर पर काम नहीं हुआ, इसलिए हम अनशन पर बैठे हैं- हेमंत चौबे,आमरण अनशन में बैठे युवक
हमारे गांव के युवक अनशन कर रहे हैं. कलेक्टर साहब से निवेदन है कि हमारे गांव की रोड खुद आकर देखें. 15 साल से रोड खराब है. जबतक मांग पूरी नहीं होगी तबतक आंदोलन करेंगे- ज्ञान बाई, आंदोलनकारी महिला
हम रोड की समस्या से परेशान हैं. हमने चक्काजाम किया है. मांग पूरी नहीं हुई तो कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे-नीरूपा साहू, आंदोलनकारी महिला
हरकत में आया प्रशासन
ग्रामीणों के सड़क में उतरने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और ग्रामीणों को चक्काजाम और आमरण अनशन समाप्त कराने में जुटा रहा.सड़क की मरम्मत के लिए 35 लाख रुपये ग्राम पंचायत को देने और शीघ्र प्रशासकीय स्वीकृति मिलने पर सड़क निर्माण करने का आश्वासन दिया. जिला प्रशासन के इस आश्वासन को ग्रामीणों ने ठुकरा दिया और सड़क निर्माण के आश्वासन पर ही आंदोलन समाप्त करने का एलान किया, जिसके बाद अधिकारी वापस लौट गए.
हमने दो तीन बिंदुओं पर बातचीत की है. मरम्मत कार्य प्रारंभ कर दिया गया है. स्वीकृति की कार्यवाही चल रही है. भारी वाहनों को प्रतिबंधित करने की भी बात है. अबतक क्लियर सहमति नहीं मिल पाई है. उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई है- ज्ञानेंद्र सिंह, एडिशनल कलेक्टर
सड़क निर्माण की मांग को लेकर पामगढ़ में महिलाओं और पुरुषों ने आंदोलन जारी रखा है और गांव में पंडाल लगा कर आमरण अनशन पर बैठे अनशनकारियों में दो की हालत बिगड़ गई है, जिन्हें उपचार के लिए जांजगीर और बिलासपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इसके बाद भी ग्रामीण अपने सड़क निर्माण नहीं होने आंदोलन को जारी रखने पर अड़े हैं.
ब्यूरो रिपोर्ट CNI NEWS


















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