श्रावण मास में शिव पूजन के लिए 6 भाग्यशाली पवित्र पौधे , भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए सफलता एवं सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त करतें हैं
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
हर-हर महादेव!
श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस माह में इन दिव्य पौधों से शिवजी का पूजन करने से सुख, शांति, समृद्धि और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। बेल (बिल्वपत्र)-
भगवान शिव को बिल्वपत्र अत्यंत प्रिय है। श्रद्धापूर्वक तीन पत्तियों वाला बिल्वपत्र अर्पित करने से पापों का नाश होता है तथा मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
"बिल्वपत्र अर्पित करें, महादेव की असीम कृपा प्राप्त करें।"
आक (मदार)-
आक के पुष्प और पत्ते शिवजी को अर्पित करने से ग्रहदोष शांत होते हैं तथा शत्रु बाधाएँ दूर होती हैं।
"आक अर्पित करें, संकटों से मुक्ति पाएं।"
शमी-
शमी का पूजन जीवन में विजय, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है।
"शमी की भक्ति से सफलता और सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त होता है।"
हरसिंगार (पारिजात)-
हरसिंगार के सुगंधित पुष्प भगवान शिव को अर्पित करने से मानसिक शांति, आनंद और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
"हरसिंगार की सुगंध से शिव कृपा का अनुभव करें।"
धतूरा-
धतूरा भगवान शिव का अत्यंत प्रिय फल माना जाता है। इसे अर्पित करने से नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है और शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
"धतूरा अर्पित करें, शिव कृपा का आशीर्वाद पाएँ।"
अपराजिता के पुष्प भगवान शिव को अर्पित करने से जीवन में विजय, सौभाग्य और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
"अपराजिता अर्पित करें, जीवन में सफलता और मंगल का स्वागत करें।"
श्रद्धा, भक्ति और सच्चे मन से किया गया शिव पूजन ही सबसे श्रेष्ठ है।
महादेव अपने भक्तों पर सदैव कृपा बरसाते हैं।


















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