पखांजूर/कांकेर से CNI NEWS शंकर सरकार की रिपोर्ट। मो-6268535584
पखांजूर: बांदे बांसागार में समस्याओं का अंबार, मालवाहक चालक और मजदूरों की जान जोखिम में
बांदे क्षेत्र के बांसागार में इन दिनों समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। शासन को करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाले इस बांसागार में काम करने वाले मजदूरों तथा बांस परिवहन में लगे मालवाहक वाहनों के चालकों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि बारिश के मौसम में मजदूरों और चालकों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, कई वर्षों के अंतराल के बाद बांस के जंगलों से कटाई कर बड़ी मात्रा में बांस को बांसागार में एकत्रित किया गया है। नियमानुसार शासन द्वारा इसकी नीलामी कर ठेकेदारों को बांस उपलब्ध कराया जाता है। इससे शासन को बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त होने के साथ ही स्थानीय वनवासी और ग्रामीणों को रोजगार का अवसर भी मिलता है।
मजदूर गर्मी के मौसम में भीषण गर्मी के बीच मेहनत कर बांस की थप्पियां तैयार करते हैं। यही मजदूर अपनी मेहनत से प्राप्त मजदूरी के माध्यम से परिवार का भरण-पोषण करते हैं। लेकिन वर्षा ऋतु में उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। बांस की थप्पियों के नीचे बारिश के दौरान सांप, बिच्छू सहित अन्य विषैले जीवों के छिपे रहने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।
बांस के परिवहन के लिए दूर-दराज से मालवाहक वाहन बांसागार पहुंचते हैं, लेकिन वहां तक पहुंचने वाली सड़क की स्थिति खराब होने के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। बारिश के दौरान कई वाहन कीचड़ में फंस जाते हैं और चालक तथा मजदूरों को चार-पांच दिनों तक वहीं रुके रहने की स्थिति निर्मित हो जाती है।
बताया जा रहा है कि बांस की थप्पियां तो तैयार कर दी जाती हैं, लेकिन उनके परिवहन के लिए आवश्यक सड़क व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। इससे न केवल परिवहन प्रभावित हो रहा है, बल्कि वाहन चालकों और मजदूरों को भी कठिन परिस्थितियों में रहना पड़ रहा है।
बांसागार का क्षेत्र काफी विस्तृत है, लेकिन यहां पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई है। इसके अलावा बांस की थप्पियों के आसपास नियमित रूप से कीटनाशक या विषैले जीवों से बचाव के लिए दवा का छिड़काव नहीं किए जाने का भी आरोप है।
वहीं, किसी संभावित आगजनी की स्थिति से निपटने के लिए अग्निशमन यंत्र जैसी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं होने की बात कही जा रही है। ऐसे में लाखों-करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाले बांसागार में मजदूरों और परिवहन से जुड़े लोगों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
समस्याओं को लेकर परलकोट परिवहन संघ के अध्यक्ष दीपांकर सरदार, बप्पा साहा, गोपाल कुंडू, संतोष दास, बिप्लब राय, कांग्रेस के पूर्व महासचिव सुप्रकाश मलिक, बांस ठेकेदार राजेश दास तथा मजदूर संघ के प्रतिनिधि अशोक, विदुर ढाली, शांति मंडल, अरुण बढ़ई सहित अन्य लोगों ने बांसागार में बैठक कर अपनी समस्याएं डिपो प्रभारी एवं रेंजर बलदेव राम मांडवी के समक्ष रखीं।
प्रतिनिधियों ने मजदूरों और मालवाहक वाहन चालकों की सुरक्षा, पेयजल, सड़क, विषैले जीवों से बचाव तथा अग्निशमन जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की।
इस पर डिपो प्रभारी एवं रेंजर बलदेव राम मंडावी ने बताया कि समस्याओं से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। उन्होंने मजदूरों के हित तथा मालवाहक वाहन चालकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जल्द ही पेयजल सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने और समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।
अब देखना होगा कि बांसागार में काम करने वाले मजदूरों और परिवहन से जुड़े लोगों की सुरक्षा तथा मूलभूत सुविधाओं को लेकर जिम्मेदार विभाग कितनी जल्दी ठोस कदम उठाता है।


















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