पखांजूर/कांकेर से CNI NEWS शंकर सरकार की रिपोर्ट। मो-6268535584
पखांजूर : माइंस का मुनाफा जारी, जनता की सड़कें बर्बाद—आखिर किसके विकास की कीमत चुका रहा परलकोट?
विकास के नाम पर धूल, गड्ढे और बदहाल सड़कें; मुट्ठीभर लोगों को रोजगार, लेकिन हजारों ग्रामीणों के हिस्से में परेशानी—भारी खनिज परिवहन पर माइंस प्रबंधन की जवाबदेही पर उठे सवाल
परलकोट क्षेत्र में खनिज परिवहन के नाम पर लगातार दौड़ रहे भारी वाहनों ने विकास की तस्वीर पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक ओर माइंस से खनिज परिवहन लगातार जारी है और दूसरी ओर क्षेत्र की सड़कें भारी वाहनों के दबाव से टूट-फूटकर बदहाल होती जा रही हैं।
धूल, गड्ढों, जर्जर पुल-पुलियों और बढ़ते यातायात के बीच हजारों ग्रामीणों को रोजाना आवागमन में परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सबसे गंभीर स्थिति अंजली पुल की बताई जा रही है। करीब 60 वर्ष पुराने इस पुल से वर्तमान में 60 से 80 टन तक के भारी वाहन गुजर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस पुल का निर्माण उस दौर के सामान्य यातायात को ध्यान में रखकर किया गया था, उस पर लगातार भारी वाहनों का दबाव बढ़ना चिंता का विषय है। पुल में दिखाई दे रही दरारों ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।
माइंस को फायदा, सड़क की कीमत जनता क्यों चुकाए?
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि खनिज परिवहन से माइंस प्रबंधन को आर्थिक लाभ हो रहा है, तो उसके कारण क्षतिग्रस्त हो रही सड़कों और पुलों की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? क्या क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को धूल, गड्ढों, जर्जर सड़कों और दुर्घटना के खतरे के रूप में विकास की कीमत चुकानी होगी?
क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि माइंस से जुड़े रोजगार का लाभ सीमित लोगों तक ही पहुंच रहा है, जबकि भारी वाहनों की आवाजाही का असर पूरे परलकोट क्षेत्र की जनता पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि रोजगार के नाम पर कुछ लोगों को अवसर मिलना अच्छी बात है, लेकिन इसके बदले हजारों लोगों की सड़कें और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बदहाल होना किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
24 घंटे भारी वाहनों की आवाजाही ने बढ़ाई परेशानी
खनिज परिवहन में लगे भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से सड़क पर धूल का गुबार उठ रहा है। कई स्थानों पर सड़क की सतह खराब हो चुकी है और गड्ढे लगातार बढ़ रहे हैं। बारिश के मौसम में यही गड्ढे पानी से भरकर और अधिक खतरनाक हो जाते हैं। दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली बच्चों, मरीजों और रोजाना आवागमन करने वाले ग्रामीणों को इसका सीधा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
जर्जर पुल पर भारी वाहन, हादसे का इंतजार तो नहीं?
अंजली पुल की स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर चिंता जताई है। यदि 60 वर्ष पुराने पुल पर लगातार भारी-भरकम वाहन दौड़ते रहे और समय रहते इसकी तकनीकी जांच एवं भार क्षमता का परीक्षण नहीं कराया गया, तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और माइंस प्रबंधन को किसी दुर्घटना के बाद जागने के बजाय पहले ही सुरक्षा के ठोस इंतजाम करने चाहिए।
वैकल्पिक मार्ग की मांग, प्रशासन को सौंपा गया पत्र*
मामले को देखते हुए अंजली नाले पर बने पुल को पहले की तरह सुरक्षित करने तथा भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने की मांग भी उठी है। स्थानीय प्रशासन एवं एसडीएम से भारी वाहनों का रूट डायवर्ट करने और जर्जर पुल पर भार कम करने की मांग की गई है।
अब सवाल माइंस प्रबंधन से
ग्रामीणों का कहना है कि खनिज संपदा परलकोट क्षेत्र का नहीं है,
सुरजागढ़ माइंस प्रबंधन पिछले 3-4 महीने से 18 चक ट्रक चला रहा था क्षेत्र में विरोध होने के बाद अब 22 चक्का चलाने लगा है,
सिर्फ खनिज निकालकर परिवहन कर देना विकास नहीं है। यदि भारी वाहनों के कारण सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो रहे हैं तो उनकी मरम्मत, सुदृढ़ीकरण, सड़क सुरक्षा और वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
माइंस से मुनाफा किसका हो रहा है और उसकी कीमत कौन चुका रहा है?
मुट्ठीभर लोगों को रोजगार के बदले हजारों ग्रामीणों को धूल, गड्ढे और दुर्घटना का खतरा, खनिज परिवहन के लिए क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं को दांव पर लगाया जा रहा है।
ग्रामीणों ने इन सवालों का जवाब अब माइंस प्रबंधन और प्रशासन—दोनों से मांगा है।




















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.