दिव्यांगता ही मेरी ताकत है - सुश्री चंचला पटेल
योगा में गोल्ड मेडल पर जमाया कब्जा
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायगढ़ - छत्तीसगढ़ योगासन स्पोर्ट्स एसोसिएशन की राज्य स्तरीय टीम की दो दिवसीय राज्य स्तरीय पारा योगासन स्पोर्ट्स चैम्पियनशिप का समापन आज अग्रोहा धाम रायगढ़ में भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। इस प्रतियोगिता में योगा अस्थिबाधित ए कैटेगरी (सत्रह से ऊपर) में सुश्री चंचला पटेल (साठ प्रतिशत दिव्यांगता) ने गोल्ड मेडल पर अपना कब्जा जमाया। कार्यक्रम के पश्चात छत्तीसगढ़ योगासन स्पोर्ट्स एसोसिएशन के महासचिव डॉ. मेजर सिंह ने उन्हें मेडल और सर्टिफिकेट प्रदान सम्मानित किया। मेडल लेने के बाद मीडिया से संक्षिप्त चर्चा करते हुये सुश्री चंचला पटेल ने अरविन्द तिवारी को बताया कि इस प्रतियोगिता के फायनल में हमें पांच आसन दिखाना था और हर आसन को पंद्रह सेकंड रोकना था। लम्बे समय से उनके प्रयास से ही यहां तक पहुंचना संभव हुआ है। गौरतलब है कि जिला मुख्यालय के समीप ग्राम बघनपुर निवासी कृषक पद्मन सिंह पटेल और श्रीमती राधिका बाई की इकलौती बेटी सुश्री चंचला पटेल वर्ष 1998 में सड़क दुर्घटना में चंचला ने एक पैर खो दी थी और अभी तक उनकी आठ से नौ सर्जरी हो चुके हैं फिर भी आज ये अपने जीवन मे खुश है और लोगो के लिये मोटिवेशनल बन चुकी हैं। उनके अच्छे कामों के लिये उन्हें अनेकों अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा कोरोना काल में लोगो को नि:शुल्क मास्क और जागरूकता के लिये इन्हें शालू जिंदल के हाथों स्वयं सिद्धा अवॉर्ड से सम्मानित होने का भी अवसर मिला है। ये वर्तमान में आशा द होप में विशेष बच्चों को शिक्षा और योगा पर प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रहेी हैं। सुश्री चंचला का कहना है कि इंसान के शरीर के एक अंग नहीं रहने से अपनी सोच को दिव्यांगता नहीं बनाना चाहिये , दिव्यांगता ही मेरी ताकत है।


















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