नेपाल में जल-प्रलय! 22 लाख टन मलबे के नीचे दबी 2359 इमारतें, 84000 लोग बेघर, राहत और बचाव अभियान जारी।
सी एन आइ न्यूज पुरुषोत्तम जोशी।
26 अगस्त को नेपाल में अचानक आई जल-प्रलय ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी. भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब एक नई चुनौती सामने है. जगह-जगह करीब 22 लाख टन मलबा जमा हो गया है.
इसमें सिर्फ मिट्टी और पत्थर ही नहीं, बल्कि टूटे मकानों के हिस्से, घरेलू सामान, पेड़-पौधे और बड़ी चट्टानें भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यानी UNDP के शुरुआती आकलन के मुताबिक, इस बाढ़ से छह जिलों की 17 नगरपालिकाओं में 84,270 लोग प्रभावित हुए हैं.
शुरुआती सर्वे में 2,359 इमारतों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है. हालांकि, राहत और बचाव का काम आगे बढ़ने के साथ नुकसान का आंकड़ा बढ़ सकता है। भारत सहित दुनिया के कई देशों ने इस भीषण जलप्रलय में नेपाल की मदद के लिए अपनी ओर प्रयास जारी किए हैं। इस जलप्रलय से आए मलबे में मकानों और दूसरी इमारतों के टूटे हिस्से, घरेलू सामान, पेड़-पौधे, मिट्टी, पत्थर और चट्टानें शामिल हैं. UNDP के अनुमान के अनुसार, करीब 5.56 लाख टन मलबा इमारतों से निकला है. बाकी मलबे में मिट्टी, पत्थर, पेड़ और दूसरी चीजें शामिल हैं. मलबे की इतनी बड़ी मात्रा को हटाना प्रशासन के लिए आसान काम नहीं है. कई जगह सड़कें और रास्ते बंद हैं. इससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी परेशानी हो रही है. मलबा हटाने के लिए भारी मशीनों और बड़े स्तर पर संसाधनों की जरूरत पड़ रही है.
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बाढ़ ने सिर्फ मकानों और सड़कों को नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी अस्त-व्यस्त कर दी है. छह जिलों की 17 नगरपालिकाओं में 84,270 लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं. कई परिवारों के घरों को नुकसान पहुंचा है और घरेलू सामान भी बर्बाद हुआ है. ऐसे में लोगों के सामने रहने की जगह से लेकर भोजन और दूसरी जरूरी चीजों तक की समस्या खड़ी हो गई है. UNDP के मुताबिक, प्रभावित आबादी में करीब 67.4 फीसदी लोग खेती-किसानी से जुड़े हैं. ऐसे में खेतों और फसलों को हुए नुकसान का असर सीधे उनकी कमाई पर पड़ सकता है. मॉनसून के दौरान आई इस बाढ़ ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. बाढ़ की मार नेपाल की बिजली व्यवस्था पर भी पड़ी है. शुरुआती आकलन में 11 जलविद्युत परियोजनाओं और एक सौर ऊर्जा संयंत्र के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है. इनकी कुल बिजली उत्पादन क्षमता 431.1 मेगावाट बताई गई है. इसके अलावा निर्माणाधीन 15 बिजली परियोजनाएं भी बाढ़ से प्रभावित हुई हैं. इन परियोजनाओं की कुल क्षमता करीब 470 मेगावाट है. नुकसान की वजह से इन परियोजनाओं का काम प्रभावित हो सकता है और उन्हें पूरा करने में देरी की आशंका है. UNDP की ओर से जारी आंकड़े फिलहाल शुरुआती आकलन पर आधारित हैं. राहत और बचाव अभियान के आगे बढ़ने और प्रभावित इलाकों में विस्तृत सर्वे होने के बाद नुकसान की तस्वीर और साफ होगी. इसका मतलब है कि प्रभावित लोगों, क्षतिग्रस्त इमारतों और मलबे से जुड़े आंकड़े आने वाले दिनों में बदल सकते हैं. फिलहाल करीब 22 लाख टन मलबे का जमा होना और 84 हजार से ज्यादा लोगों का प्रभावित होना तबाही की गंभीरता को साफ दिखाता है.
अब नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे को जल्द हटाने के साथ प्रभावित लोगों तक राहत और जरूरी सुविधाएं पहुंचाने की है. बाढ़ का पानी भले ही कई इलाकों से उतर गया हो, लेकिन उसके पीछे छूटा मलबा और नुकसान लंबे समय तक लोगों के लिए परेशानी बना रह सकता है।




















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