सी एन आई न्यूज रिपोर्टर रमेश श्रीवास्तव पिथौरा
फॉर्म हाउस में संचालित शंकरा ग्लोबल स्कूल पर गंभीर सवाल
44 बच्चों के बीच पांचवीं तक कक्षाएं, यू-डाइस कोड से लेकर स्कूल भूमि और खेल मैदान तक उठे सवाल
पिथौरा। महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सावित्रीपुर के आश्रित क्षेत्र तिलंजनपुर में संचालित बताए जा रहे शंकरा ग्लोबल स्कूल को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार स्कूल में करीब 44 बच्चे अध्ययनरत हैं और कक्षा पांचवीं तक पढ़ाई संचालित होने की बात सामने आई है। लेकिन स्कूल के संचालन स्थल, यू-डाइस कोड, भूमि उपयोग और खेल मैदान जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि स्कूल का संचालन फॉर्म हाउस परिसर में किया जा रहा है। स्कूल के आसपास खेत दिखाई देते हैं और परिसर का स्वरूप सामान्य शैक्षणिक संस्था के बजाय कृषि क्षेत्र से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जिस परिसर में बच्चों को शिक्षा दी जा रही है, क्या वह स्कूल संचालन के लिए निर्धारित सभी आवश्यक मापदंडों को पूरा करता है?
यू-डाइस कोड को लेकर सवाल
स्कूल से संबंधित जानकारी मांगने पर यू-डाइस (UDISE) कोड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आने का दावा किया गया है। यदि किसी विद्यालय में नियमित रूप से बच्चे अध्ययनरत हैं और कक्षा पांचवीं तक शिक्षण संचालित हो रहा है, तो उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड और विभागीय पंजीयन की स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
ऐसे में शिक्षा विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित संस्था का विभागीय रिकॉर्ड क्या है, उसका यू-डाइस कोड क्या है तथा स्कूल को किस स्तर तक संचालन की अनुमति या मान्यता प्राप्त है।
जिसे बताया गया प्ले ग्राउंड, वहां खेत की तैयारी?
मामले का एक और पहलू स्कूल द्वारा बताए गए प्ले ग्राउंड को लेकर सामने आया है। जानकारी के अनुसार जिस स्थान को संस्था द्वारा बच्चों के खेल मैदान के रूप में बताया गया, उस जमीन पर खेती के लिए जोताई किए जाने की बात सामने आई है।
यदि उक्त भूमि वास्तव में विद्यालय का खेल मैदान है, तो वहां कृषि कार्य क्यों किया गया? और यदि भूमि कृषि उपयोग में है तो उसे बच्चों के खेल मैदान के रूप में किस आधार पर बताया गया? इन सवालों का जवाब संबंधित संस्था और शिक्षा विभाग से अपेक्षित है।
बिना डायवर्सन भूमि पर स्कूल संचालन का सवाल
स्कूल जिस भूमि पर संचालित बताया जा रहा है, उसके डायवर्सन की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि भूमि का उपयोग कृषि प्रयोजन के लिए दर्ज है और उसी भूमि पर व्यावसायिक/शैक्षणिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो संबंधित भूमि के उपयोग परिवर्तन की वैधानिक स्थिति क्या है, इसकी जांच आवश्यक है।
इसके अलावा परिसर में इमारती लकड़ी के पेड़ों की कटाई किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि पेड़ों की कटाई किस अनुमति के तहत हुई, इसकी पुष्टि संबंधित विभागीय रिकॉर्ड से ही हो सकती है। इसलिए राजस्व एवं वन विभाग द्वारा मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
44 बच्चों की सुरक्षा और सुविधाओं की जिम्मेदारी किसकी?
स्कूल में करीब 44 बच्चों के अध्ययनरत होने की जानकारी है। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल बच्चों की सुरक्षा और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही शैक्षणिक सुविधाओं का है। विद्यालय भवन, भूमि उपयोग, अग्नि सुरक्षा, शौचालय, पेयजल, खेल मैदान तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं या नहीं—इसकी जांच संबंधित विभाग द्वारा की जानी चाहिए।
विभागीय जांच से सामने आएगी वास्तविकता
मामला केवल एक निजी संस्था के संचालन का नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ा विषय है। इसलिए शिक्षा विभाग को दस्तावेजों के आधार पर यह स्पष्ट करना चाहिए कि शंकरा ग्लोबल स्कूल को किस स्तर तक संचालन की अनुमति है, उसका यू-डाइस रिकॉर्ड क्या है, भवन एवं भूमि की स्थिति क्या है और बच्चों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं।
वहीं राजस्व विभाग को भूमि के डायवर्सन की स्थिति तथा संबंधित भूमि के वास्तविक उपयोग की जांच करनी चाहिए। यदि पेड़ों की कटाई हुई है तो संबंधित विभाग से अनुमति की स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।
इन सभी बिंदुओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी कि स्कूल का संचालन निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं।



















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