मैया यशोदा ने गणेश चतुर्थी व्रत रख कान्हा की लंबी उम्र व सुरक्षा का आशीर्वाद लिया।
सी एन आइ न्यूज पुरुषोत्तम जोशी।
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार,एक बार भाद्रपद मास की गणेश चतुर्थी के दिन मैया यशोदा ने भगवान गणेश को प्रसन्न करने और अपने लाडले कान्हा की लंबी उम्र व सुरक्षा के लिए व्रत रखा था। उन्होंने बप्पा के भोग के लिए रसोई में बेहद स्वादिष्ट और सुगंधित मोदक और लड्डू तैयार किए।
नटखट कान्हा की शरारत: बाल कृष्ण (कान्हा) स्वभाव से बहुत नटखट थे और उन्हें मीठा बेहद पसंद था। जैसे ही उन्होंने रसोई में ताजे मोदक बनते देखे, उनके मुंह में पानी आ गया। वे चुपके से पूजा कक्ष में घुसे और भगवान गणेश को भोग लगाने से पहले ही खुद मोदक खाने लगे।
मैया यशोदा का क्रोध और कान्हा को बांधना: जब मैया यशोदा पूजा की थाली लेकर आईं, तो उन्होंने देखा कि कान्हा ने भोग झूठा कर दिया है। धार्मिक नियमों के उल्लंघन और कान्हा की इस निरंतर शरारत से परेशान होकर मैया को क्रोध आ गया। उन्होंने कान्हा को डांटा और सजा के तौर पर उनके हाथ सामने की ओर बांध दिए । इसके बाद मैया स्वयं बैठ गईं और रोते हुए भगवान गणेश से इस भूल के लिए क्षमा मांगने और प्रार्थना करने लगीं।
भगवान गणेश का प्रकट होना: मैया यशोदा की सच्ची भक्ति और कान्हा के निश्चल प्रेम को देखकर विघ्नहर्ता भगवान गणेश साक्षात प्रकट हो गए। लेकिन वहां जो हुआ, उसने मैया यशोदा को हैरान कर दिया। भगवान गणेश ने मैया से क्रोधित होने के बजाय मुस्कुराते हुए अपने थाल में से मोदक उठाए और बंधे हुए नन्हे कान्हा के मुंह में खिलाने लगे।
कथा का आध्यात्मिक संदेश: जब मैया यशोदा ने यह दिव्य दृश्य देखा, तो उनकी आंखें खुली की खुली रह गईं। तब भगवान गणेश ने मैया को समझाया कि श्री कृष्ण कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं ब्रह्मांड के स्वामी नारायण हैं। भगवान को चढ़ाया जाने वाला कोई भी भोग तब तक स्वीकार्य नहीं होता जब तक उसमें प्रेम न हो, और कान्हा ने तो उस मोदक को खाकर उसे पहले ही दिव्य बना दिया था। इसके बाद श्री कृष्ण ने गोकुल वासियों को चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने का महत्व बताया।


















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