भुवनेश्वर का प्राचीन लिंगराज मंदिर -यहां भगवान शिव और विष्णु जी की पूजा संयुक्त रूप से की जाती है।
सी एन आइ न्यूज पुरुषोत्तम जोशी। भुवनेश्वर- ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित लिंगराज मंदिर (जिसे अक्सर लिंगेश्वर मंदिर भी कहा जाता है) यहाँ का सबसे प्राचीन और विशाल मंदिर है।
यह भव्य प्राचीन मंदिर में भगवान शिव और भगवान विष्णु (हरिहर) की पूजा संयुक्त रूप से की जाती है।
इस मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में सोमवंशी राजा ययाति प्रथम ने करवाया था।
यह कलिंग वास्तुकला (Kalinga Architecture) का एक बेहतरीन बेजोड़ और अद्भुत उदाहरण है, जो लाल बलुआ पत्थर से बना है।
यहाँ का स्वयंभू शिवलिंग जमीन से करीब 8 इंच ऊपर और 8 फीट व्यास का है।
मुख्य मंदिर के आसपास लगभग 64 से 150 छोटे-छोटे मंदिर स्थित हैं, जो पूरे प्रांगण को और भी भव्य बनाते हैं।
महाशिवरात्रि और अशोकष्टमी यहाँ के सबसे बड़े और प्रसिद्ध त्योहार के रूप में मनाया जाता हैं, जिनमें देश भर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
इस लिंगराज मंदिर परिसर में केवल हिंदू धर्म के अनुयायियों को ही अंदर जाने की अनुमति है। अन्य पर्यटकों के लिए बाहर एक विशेष मंच बनाया गया है जहाँ से वे मंदिर के दर्शन और नज़ारे देख सकते है।मंदिर सुबह 6:30 बजे से श्रृद्धालुओं के लिए दर्शन के लिए खुला रहता है।






















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