शिक्षक दिवस विशेष.......
आखिर मा कब मिल ही सम्मान.....
दुनियां भर के मँनखे मन ला दे थे वो हा ज्ञान।
नइ राखे वो हा अपन सुख_ दुख के धियान।।
हम सब झन हा कहिथन वोला राष्ट्र निर्माता।
फेर काबर होवत हे गुरुजी मन के अपमान।।
पहली के जमाना मा केवल हमर गुरु जी होवे।
लइका मन संग हाँसे, बोले अउ संगे मा रोवे।।
शिक्षा अउ दीक्षा दे के करे वो मन राष्ट्र निर्माण।
दैहिक, दैविक अउ भौतिक ज्ञान गंगा मा खोवे।।
भगवान ले घलो बढ़ के रीहिस हे उखर स्थान।
देवता अउ राक्षस मन करें भाई उखर गुणगान।।
अपन गुरु आज्ञा के जेमन करे हे गा अवहेलना।
अपमानित हो के ओमन जाय सोझे शमशान।।
विश्व गुरु के देश मा आज होवत हे गा अपमान।
नौकरी,पदोन्नति,क्रमोन्नति बर माँगत हे वरदान।।
जेमन हा शिक्षा के अधिकार टेट ले प्रभावित हन।
नेता,मंत्री,संत्री मन के आफिस के चक्कर लगान।।
इखर पढ़ाए लइका मन हा गा बड़े-बड़े पद पाय।
डाक्टर,मास्टर,कलेक्टर,पुलिस बन नाम कमाय।।
कोनो बने हे वकील कोनो जज, कोनो बने नेता।
अपन गुरु के योग्यता मा खुदे प्रश्न चिन्ह लगाय?
गुरु पूर्णिमा अउ शिक्षक दिवस के हो थे जी मान।
बाकी दिन लोगन मन हा कर थे गा बड़ अपमान।।
गुरुजी ला गुरुजी राहन दो झन देवव दूसर काम।
स्कूल जाहि लइका ला पढ़ाही तभी बढ़ही शान।।
तुलेश्वर कुमार सेन
सलोनी राजनांदगांव


















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