बीग ब्रेकिंग बैलाडीला
लोकेशन दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़
रिपोर्टर। असीम पाल ब्यूरो
चीफ दंतेवाड़ा
बैलडीला. बचेली बी.टी.ओ.ए वार्षिक चुनाव में घोषणा पत्र सिर्फ चुनावी झुनझुना कह रहे शदस्य
बैलाडीला ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव आते ही सक्रिय होते हैं दर्जनों शुभचिंतक और हितैषी जीत के बाद घोषणाएं क्यों हो जाती हैं गुम ?
वोट शदस्यो का, वादे प्रत्याशियों के… हर साल क्यों छले जाते हैं वाहन मालिक और सदस्य?
चुनाव आते ही घोषणाओं की गूंज हो गई तेज
जीत के बाद वादों पर क्यों लग जाता है ‘ब्रेक’?
दंतेवाड़ा जिले के बचेली .बैलाडीला मे ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन (B.T.O.A.) के वार्षिक चुनाव की घोषणा होते ही चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। चुनाव कार्यक्रम जारी होने के साथ ही संभावित प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की सक्रियता भी बढ़ने लगी है।
चुनावी मैदान में उतरने वाले दावेदार ट्रक मालिकों के हित में बड़े-बड़े वादे और घोषणाएं करने प्रारंभ कर दिए हैं।
लेकिन ट्रक मालिकों के बीच अब एक सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है—क्या चुनावी घोषणाएं वास्तव में चुनाव के बाद भी याद रहती हैं ?
हर चुनाव में दर्जनों लोग ट्रक मालिकों के हितैषी बनकर सामने आते हैं। कोई भाड़ा बढ़ाने की बात करता है, कोई लोडिंग पॉइंट जाने वाली सड़क बनवाने की ,कोई पार्किंग व्यवस्था की तो कोई स्थानीय ट्रांसपोर्टरों को प्राथमिकता दिलाने का दावा करता है, तो कोई एसोसिएशन में पारदर्शिता और सदस्यों के हितों की रक्षा का भरोसा देता है। मगर आरोप यह भी लगते रहे हैं कि चुनाव जीतने के बाद कई घोषणाएं पुर्ण तो नहीं होती प्रन्तु वादे धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में जरूर चले जाते हैं।
वहीं चुनाव हारने वाले प्रत्याशी भी चुनाव परिणाम के बाद अक्सर सार्वजनिक गतिविधियों से गायब नजर आते हैं। ऐसे में ट्रक मालिकों के बीच यह चर्चा तेज है कि चुनावी मौसम में दिखाई देने वाले ‘हितैषी’ आखिर चुनाव के बाद कहां चले जाते हैं?
20 सितंबर को होगा मतदान
जारी चुनाव कार्यक्रम के अनुसार नामांकन प्रक्रिया 8 और 9 सितंबर 2026 को होगी। नाम वापसी 11 सितंबर तक, स्क्रूटनी 12 सितंबर को तथा चुनाव चिन्ह आवंटन भी 12 सितंबर को किया जाएगा। 20 सितंबर 2026 को सुबह 7:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक मतदान होगा तथा शाम 4:30 बजे से मतगणना प्रारंभ की जाएगी।
अब देखना दिलचस्प होगा कि इस बार चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशी वादों और घोषणाओं से आगे बढ़कर ट्रक मालिकों के सामने ठोस कार्ययोजना रखते हैं या फिर घोषणा पत्र एक बार फिर सिर्फ चुनावी ‘झुनझुना’ बनकर रह जाता है।
ट्रक मालिकों की निगाहें अब प्रत्याशियों के घोषणा पत्र, वादों और चुनाव के बाद उनके वास्तविक कामकाज पर टिकी हैं।



















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