बिलाईगढ़ की प्रशासनिक 'नौटंकी'। खस्ताहाल सड़कें, कुर्सी की मलाई और साजिशों का जाल
बिलाईगढ़। नगर पंचायत बिलाईगढ़ में इन दिनों जनसेवा और विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं, जबकि प्रशासनिक खींचतान और राजनीतिक ड्रामा चरम पर है। स्थिति यह है कि अभी नए सीएमओ यशवंत देवांगन को आए 'जुम्मा-जुम्मा' 15 दिन भी पूरे नहीं हुए हैं कि उनके खिलाफ आरोपों का प्रायोजित खेल शुरू कर दिया गया।
विकास रोकने की साजिश। सड़क बनाने की क्या जरूरत है।
बिलाईगढ़ की जनता लंबे समय से जर्जर और खस्ताहाल सड़कों से जूझ रही है। जब नए सीएमओ ने कार्यभार संभालते ही जनहित में सड़कों और गलियों के सुधार कार्य की शुरुआत की, तो बजाय उनका सहयोग करने के, एसडीएम प्रफुल्ल रजक ने खुलेआम अड़ंगा लगाना शुरू कर दिया। सूत्रों के अनुसार एसडीएम साहब का साफ कहना है कि "सड़क और गली बनाने की क्या जरूरत है, बिलाईगढ़ जैसा है वैसा ही रहने दो।" बिलाईगढ़ के विकास को रोकने की यह मानसिकता साफ दर्शाती है कि प्रशासनिक प्राथमिकताओं में जनता की सहूलियत दूर-दूर तक नहीं है।
आवास में घुसकर दबाव और 'झूठे आरोपों' का हथियार।
आरोप है कि एसडीएम रजक नए सीएमओ के निजी आवास में जबरन दखल देकर "मेरे हिसाब से काम करो" का अनुचित मानसिक दबाव बना रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि महज 15 दिनों के भीतर आखिर कौन सा लैंगिक उत्पीड़न हो गया। बिलाईगढ़ क्षेत्र में यह ट्रेंड बनता जा रहा है कि किसी भी नए या ईमानदार अधिकारी को रास्ते से हटाने के लिए छेड़ाखानी या लैंगिक उत्पीड़न जैसे मनगढ़ंत केस का सहारा लिया जाए। यह पूरा ताना-बाना केवल नए सीएमओ को डराकर बैकफुट पर धकेलने के लिए बुना गया है।
'फूट डालो-मलाई खाओ' नीति और जनता में आक्रोश।
एसडीएम की इस कार्यप्रणाली से बिलाईगढ़ के लोग बेहद आक्रोशित हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि बिना लेन-देन के कोई काम नहीं होता और "फूट डालो, मलाई खाओ" की नीति पर प्रशासन चलाया जा रहा है। जनता ने साफ कहा है कि यदि अधिकारी को प्रशासनिक कुर्सी पर बैठकर केवल नेतागिरी और गुटबाजी करनी है, तो उन्हें नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक राजनीति में उतर जाना चाहिए।
पुराने सीएमओ सुशील चौधरी के तबादले के लिए बिलाईगढ़ की जनता ने तीन-चार दिनों तक बिलाईगढ़ बंद करके उग्र प्रदर्शन किया था। लेकिन एसडीएम साहब का पुराने निजाम से 'मोह' छूटने का नाम नहीं ले रहा है, जिसके चलते नए अधिकारी को निशाना बनाया जा रहा है।
अब एसडीएम के घेराव की तैयारी।
प्रशासनिक उत्पीड़न, एसडीएम पर एफ आई आर और विकास कार्यों में रोड़े अटकाने के इस रवैये से तंग आकर बिलाईगढ़ की जनता ने अब खुद सड़कों पर उतरने का मन बना लिया है। आम नागरिक अब सीधे एसडीएम साहब का घेराव करने की रणनीति बना रहे हैं। यदि उच्च अधिकारियों और शासन ने इस पूरे फर्जीवाड़े और मानसिक प्रताड़ना की निष्पक्ष जांच नहीं की, तो बिलाईगढ़ में एक बार फिर बड़ा जनांदोलन खड़ा होना तय है।


















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