15 वर्षों से लंबित 13 एकड़ शासकीय भूमि विवाद, शिकायतों के बाद भी नहीं हुआ समाधान
पाठशाला एवं चरागाह के लिए आरक्षित भूमि पर नक्शा कटने के आरोप, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई
CNI NEWS बिलासपुर छत्तीसगढ़ से दिलीप सोनवानी की रिपोर्ट
बेलगहना/कोटा (बिलासपुर)। तहसील बेलगहना, विकासखंड कोटा, जिला बिलासपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत लुफा के आश्रित ग्राम लहंगामाठा में लगभग 13 एकड़ शासकीय भूमि से जुड़ा मामला पिछले करीब 15 वर्षों से विवादों और शिकायतों के बावजूद लंबित बना हुआ है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह भूमि पाठशाला एवं चरागाह जैसी सार्वजनिक आवश्यकताओं के लिए आरक्षित है, इसके बावजूद भूमि के नक्शे में कटौती किए जाने को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार संबंधित भूमि के संबंध में ग्राम पंचायत का प्रतिवेदन लिए बिना ही नक्शा काटे जाने की कार्रवाई की गई।
इस विषय में ग्रामीणों द्वारा कई बार तहसील कार्यालय बेलगहना, एसडीएम कार्यालय तथा कलेक्टर कार्यालय बिलासपुर में आवेदन एवं ज्ञापन प्रस्तुत किए गए, लेकिन अब तक किसी प्रकार का ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने शासन की शिकायत निवारण व्यवस्था एवं हेल्पलाइन के माध्यम से भी मामले को उठाया, परंतु अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
इसके अतिरिक्त सुशासन तिहार के दौरान भी इस विषय को प्रमुखता से उठाते हुए आवेदन प्रस्तुत किया गया था, लेकिन वहां से भी कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
गांव के लोगों का आरोप है कि लगातार शिकायतों और मांगों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर मामले की गंभीरता से जांच नहीं की गई। इस कारण ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि यह भूमि वास्तव में पाठशाला और चरागाह के लिए आरक्षित है तो इसकी सुरक्षा और संरक्षण प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
हाल ही में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के दौरे के दौरान भी ग्रामीणों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है।
ग्रामीणों की मांग है कि 13 एकड़ शासकीय भूमि से संबंधित समस्त राजस्व अभिलेखों, नक्शा कटौती की प्रक्रिया तथा उसके आधारों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि नक्शा काटने से पहले ग्राम पंचायत का प्रतिवेदन लिया गया था या नहीं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही पाठशाला एवं चरागाह के लिए आरक्षित भूमि को सार्वजनिक हित में सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल भूमि का मामला नहीं, बल्कि गांव के भविष्य, बच्चों की शिक्षा और पशुपालकों की आजीविका से जुड़ा विषय है। इसलिए प्रशासन को इस मामले का शीघ्र और न्यायसंगत निराकरण करना चाहिए।
दिलीप सोनवानी
CNI NEWS, ब्यूरो चीफ बिलासपुर,( छ,ग,)
मो,9340810592























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