मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर ने दुनियां को कहा अलविदा
राजकीय सम्मान के साथ होगा अन्तिम संस्कार
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
मुम्बई - बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता नाना पाटेकर (75 वर्षीय) का आज निधन हो गया। सूत्रों के मुताबिक नाना पाटेकर अपने गोवा स्थित घर में बेहोश मिले थे। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया , जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। गोवा के मणिपाल अस्पताल के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने कहा कि लगातार 45 मिनट तक सीपीआर देने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की जानकारी मिलने के बाद फिल्म इंडस्ट्री सहित राजनीतिक और उनके फैंसों में में शोक की लहर फैल गई है। प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार आज शाम चार बजे पूरे राजकीय सम्मान के साथ पुणे के निकट डोंजे गांव स्थित उनके फार्महाउस पर किया जायेगा। महाराष्ट्र सरकार ने उनके सिनेमा और समाज सेवा में दिये गये योगदान को देखते हुये राजकीय सम्मान देने की घोषणा की है। बताते चलें कि नाना पाटेकर का फिल्मी सफर करीब पांच दशक लंबा रहा। उन्होंने साल 1978 में रिलीज हुई फिल्म गमन से अपने अभिनय केरियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में कई यादगार किरदार निभाये। लगभग एक सौ से भी ज्यादा फिल्मों में अभिनय करने वाले नाना पाटेकर हिंदी सिनेमा के उन एक्टर्स में गिने जाते हैं , जिन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग और अलग अंदाज से पहचान बनाई। उन्होंने अपने फिल्म गमन के बाद सिंहासन , अंकुश , प्रतिघात और सलाम बॉम्बे जैसी फिल्मों में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया। वर्ष 1992 में आई अंगार के लिये उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला , वहीं क्रांतिवीर (1994) उनके करियर की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल रही। इस फिल्म के लिये उन्हें नेशनल अवॉर्ड और फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। नाना ने परिंदा, तिरंगा , अग्निसाक्षी , खामोशी: द म्यूजिकल , वेलकम , अपहरण और राजनीति जैसी फिल्मों में भी काम कर सबके दिलों पर राज किया। विलेन से लेकर कॉमेडी और सीरियस किरदारों तक उन्होंने कई तरह के रोल निभाये। अपनी दमदार आवाज , प्रभावशाली संवाद अदायगी और अलग तरह की अभिनय शैली के कारण नाना पाटेकर ने फिल्म इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई। उन्होंने अपने लम्बे केरियर में कई चर्चित फिल्मों में काम किया। परिंदा , प्रहार , अंगार , क्रांतिवीर , तिरंगा , खामोशी: द म्यूजिकल और अब तक छप्पन जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। क्रांतिवीर में उनके अभिनय ने उन्हें खास पहचान दिलाई। वहीं परिंदा और प्रहार जैसी फिल्मों में उनके गंभीर और प्रभावशाली किरदारों को भी दर्शकों ने खूब सराहा।
आ गये मेरी मौत का तमाशा देखने -
नाना पाटेकर फिल्म क्रांतिवीर वर्ष 1994 में आई थी , इसमें नाना पाटेकर का फेमस डायलॉग है ये - आ गये मेरी मौत का तमाशा देखने। अब मुझे लटका देंगे , जुबान ऐसी बाहर आयेगी , आंखें बाहर आयेगी , थोड़ी देर लटकता रहूंगा। फिर ये मेरा भाई मुझे नीचे उतार देगा , फिर आप चर्चा करते घर चले जाओगे , खाना खाओगे , सो जाओगे। तुम्हारी ये नामर्दानगी , बुजदिली एक दिन इस देश की मौत का तमाशा इसी खामोशी से देखेगी। कुछ नहीं कहना मुझे तुम्हें , कुछ नहीं। तुम्हारी जिंदगी में कोई फर्क पड़ने वाला नहीं। अंधेरे में रहने की आदत पड़ी है तुमको , गुलामी करने की आदत पड़ी है। ये सिर्फ संवाद नहीं थे बल्कि नाना की आवाज , उनका चेहरा , आंखों का गुस्सा और बोलने का अंदाज मिलकर इन्हें ऐसा बना देते थे कि दर्शक उन्हें भूल नहीं पाते।


















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