चुनाव आयोग की स्पष्टता से विपक्ष के आरोपों की खुली पोल : स्वप्निल तिवारी
तथ्यहीन आरोपों और भ्रम की राजनीति से लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम न करे विपक्ष
महासमुंद-मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर कांग्रेस एवं विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर भारतीय जनता पार्टी के जिला प्रवक्ता स्वप्निल तिवारी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े विषयों पर राजनीति करने के बजाय तथ्यों, कानून और संवैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। निर्वाचन आयोग की ओर से दी गई स्पष्टता के बाद SIR को लेकर विपक्ष द्वारा खड़े किए जा रहे अनेक सवालों की वास्तविकता सामने आ गई है। विपक्ष को चाहिए कि वह आधिकारिक तथ्यों और संवैधानिक व्यवस्था का अध्ययन करे तथा मतदाताओं के बीच भ्रम फैलाने से बचे।
मतदाता सूची का समय-समय पर पुनरीक्षण लोकतांत्रिक निर्वाचन व्यवस्था का आवश्यक हिस्सा है। इसका उद्देश्य पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित करना तथा सूची को अधिक अद्यतन एवं त्रुटिरहित बनाना है। निर्वाचन आयोग की मतदाता सेवाओं के माध्यम से नागरिक अपने नाम की जांच, विवरण में सुधार, नए मतदाता के रूप में पंजीयन तथा आवेदन की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। नए मतदाताओं के पंजीयन के लिए फॉर्म-6 की सुविधा भी उपलब्ध है।
स्वप्निल तिवारी ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन गंभीर आरोप लगाने से पहले उसके समर्थन में प्रमाण और तथ्य प्रस्तुत करना भी उतना ही आवश्यक है। केवल राजनीतिक आरोपों और सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट बातों के आधार पर निर्वाचन प्रक्रिया पर अविश्वास पैदा करना उचित नहीं है।
भाजपा जिला प्रवक्ता ने कहा कि ईवीएम, मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग जैसे विषयों पर लगातार संदेह का वातावरण बनाने से सबसे अधिक नुकसान लोकतांत्रिक व्यवस्था और आम मतदाता के विश्वास को होता है। राजनीतिक दलों को अपनी आपत्तियां संवैधानिक एवं कानूनी मंचों पर तथ्यों के साथ रखने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बिना पर्याप्त आधार के आरोप लगाना उचित नहीं है। चुनाव लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में हो और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में न रहे, यह सुनिश्चित करना निर्वाचन व्यवस्था की जिम्मेदारी है। साथ ही नागरिकों और राजनीतिक दलों की भी जिम्मेदारी है कि वे मतदाता सूची के पुनरीक्षण में सहयोग करें और पात्र मतदाताओं को जागरूक करें।
स्वप्निल तिवारी ने कहा कि कांग्रेस एवं विपक्षी दल यदि निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर कोई ठोस आपत्ति रखते हैं तो उन्हें संबंधित दस्तावेजों और प्रमाणों के साथ निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए। केवल राजनीतिक बयानबाजी के माध्यम से संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करना लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर करता है।राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व को निर्वाचन आयोग के संबंध में लगाए गए आरोपों पर तथ्य सामने रखने चाहिए और यदि उनके आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो देश की जनता तथा संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। लोकतंत्र में संस्थाओं की आलोचना तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि राजनीतिक सुविधा के अनुसार।
उन्होंने कहा कि भाजपा का स्पष्ट मत है कि मतदाता सूची हो या निर्वाचन प्रक्रिया—हर विषय पर पारदर्शिता, कानून और संवैधानिक व्यवस्था सर्वोपरि होनी चाहिए। जनता को भ्रमित करने के बजाय राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।


















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