अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
बिलासपुर - मां बच्चो की पहली गुरु है , मां बच्चो के लिये अनेकों तप करती है दु:ख सहती है , खुद भूखी रह लेती है पर अपने बच्चों को भूखा नहीं रखती। मां के महत्व को बच्चो को समझाने के लिये सीमा वर्मा ने निबन्ध प्रतियोगिता आयोजित किया जिसमे 50 बच्चो ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में किसी बच्चे ने अपनी मां के हाथो बने खाने की तारीफ की , किसी ने अपनी मां को दुनियां की सबसे अच्छी मां बताया। बच्चो के मन की बात को जानने के लिये ही सीमा ने यह निबंध प्रतियोगिता आयोजित की ताकि बच्चो के मन में अपनी मां के लिये जो प्रेम है उसे शब्दों में पिरोया जाये। सीमा ने बच्चो के द्वारा लिखी गयी निबन्ध को उनके माताओ के सामने पढ़कर सुनाया जिससे कई मातायें भावुक हो गईं। सीमा ने इन बच्चों को पुरस्कार स्वरूप कम्पास बाक्स और चाकलेट भी वितरित किये। बताते चलें कि सीमा का मुख्य उद्देश्य बच्चो को पढ़ाई के साथ साथ संस्कारवान बनाना भी है। सीमा बच्चो के अंदर के डर को साहस में बदलने का कार्य कर रही ताकि बच्चों को भविष्य सुनहरा हो , बच्चें अपने अंदर की प्रतिभा को पहचान सके और परिस्थिति से कभी हार नहीं मानें। यही सब बातें सीमा के फ्री ट्यूशन क्लास में पढ़ाई के अलावा सिखायी जाती है। सीमा सोशल मीडिया पर लगातार लोगो से अपील करती है अपने आस पास के बच्चो को शिक्षा से जोड़े , दिया तले अंधेरा ना बने। अपने एक रूपया मुहिम से अब तक इन्होंने तेरह हजार से अधिक बच्चो को स्टेशनरी बांटे,33 बच्चो के साल साल भर की फीस चुकायी और 50 बच्चो को फ्री ट्यूशन क्लास दे रही हैं। सीमा वर्मा खुद एक कॉलेजियन स्टूडेंट है लेकिन फिर भी बिना किसी एनजीओ के इनके द्वारा बेहद सराहनीय कार्य किया जा रहा है।


















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