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Tuesday, March 16, 2021

केंद्र सरकार के तीनो किसान कानून, किसानों के लिए खुद अपने डेथ वारंट में हस्ताक्षर करने जैसा : डॉ. सौरभ निर्वाणी

 


पंंकज शर्मा, रायपुर : किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव डॉ. सौरभ निर्वाणी ने छत्तीसगढ़ से भाजपा के  सभी 9 लोकसभा सांसदों को  और 2 राज्यसभा सांसदों पत्र लिखकर किसानों के खिलाफ लाये गए कानून के प्रति जनभावनाओं को केन्द्र सरकार से अवगत कराने की मांग की है,साथ ही साथ किसान कांग्रेस के पदधिकारियो से अपने अपने गांव में किसानों के विरुद्ध केंद्र सरकार द्वारा लाये गए तीनो कानून के खिलाफ जागरूकता जगाने छोटे छोटे चौपाल लगाने को कहा है। डॉ. निर्वाणी ने कहा कि मौजूदा केन्द्र की सरकार कैकयी हठ पर तुली है,हठ छोड़ने को राजी ही नही, जिले के किसानों ने खून से हस्ताक्षर कर चिट्ठी भी भेजी कानून वापस ले लीजिए, जनभावनाओं के अनुकूल नही है। सदन में बहुमत है तो आप देश को नही बेच सकते, बर्बरता और ताकत से दिलों में जगह नही बनाई जाती, दिल्ली के बॉर्डर में किसानों के साथ जो सुलूक हो रहा पूरा देश देख रहा है। केन्द्र सरकार के सत्कर्मों पर इस एक किसान विरोधी कानून की जिद ने पानी फेर दिया है। लेकिन इस कैकयी हठ का परिणाम इस बार उल्टा पड़ने वाला है। किसानो ने इस सरकार को बनवास पर भेजने का पूरा मन बना लिया है। अगर सरकार की नीयत साफ है,किसान विरोधी नही, उसकी हितैसी है। तो लाये गए कानून में लिखित में प्रावधान हो कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों के पैदावार की खरीदी होगी,एक तरफ छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार है जो किसानों के पैदावार के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य के अलावा बोनस दे रही है। गौपालक किसानों के गोबर तक को खरीद रही है इसके पीछे की सोच सिर्फ यही है कि अन्नदाता किसान की आर्थिक स्थिति मजबूत हो, उसका शोषण रुके,उनका पलायन रुके। अभी बहुत देर नही हुई है किसानों के हित में जनभावनाओं का सम्मान करते हुए तीनो किसान विरोधी बिल सरकार वापस ले ले, लोकतंत्र में जनभावनाओं और अपेक्षाओं का जो सम्मान नही करता उसे प्रजा सबक सिखाना जानती है। छत्तीसगढ़ के भाजपा सांसदों को लिखे अपने पत्र में उल्लेख किया है। की कोई भी संसद सदस्य किसान कानून के समर्थन में डिबेट करना चाहे तो किसी भी खुले मंच में वह इस कानून के काले पक्ष को उन्हें भी समझा सकते हैं। किसानों की भलाई खुद किसानों से बेहतर कोई नही समझता यह बात केन्द्र में बैठे लोगों को समझ क्यों नही आती। तीनो किसान कानून को स्वीकार करना किसानों के लिए अपने डेथ वारंट में दस्तखत करने जैसा होगा,इसका पुरजोर विरोध तब तक किया जाएगा जब तक इस कानून को वापस नही ले लिया जाता....

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