अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर -- पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी और कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री करुणा शुक्ला (70 वर्षीया) का कोरोना से निधन हो गया। कोरोना संक्रमित होने के बाद राजधानी के रामकृष्ण हॉस्पिटल में उनका उपचार चल रहा था जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई। वर्तमान में वे समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष थीं। उनका अंतिम संस्कार कोविड गाइडलाइंस का पालन करते हुये बलौदाबाजार जिला स्थित उनके गृहग्राम में किया गया। पति डॉ. माधव शुक्ला ने पीपीई किट पहनकर करुणा शुक्ला को मुखाग्नि दी। इस दौरान परिवार की तरफ से उनकी पुत्री रश्मि , भतीजा योगेश शुक्ला , उनकी पत्नी और अन्य लोग मौजूद रहे। छग के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने करुणा शुक्ला के निधन पर शोक जताते हुये कहा कि मेरी करुणा चाची यानी करुणा शुक्ला नहीं रहीं , निष्ठुर कोरोना ने उन्हें भी लील लिया। राजनीति से इतर उनसे बहुत आत्मीय पारिवारिक रिश्ते रहे और उनका सतत आशीर्वाद मुझे मिलता रहा। ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें और हम सबको उनका विछोह सहने की शक्ति।
संक्षिप्त परिचय
करूणा शुक्ला का जन्म 01अगस्त 1950 को ग्वालियर में हुआ था। 32 साल भाजपा में रहने के बाद उन्होंने अचानक कांग्रेस का दामन थाम लिया था। करूणा को पार्टी में लाने के लिये अजीत जोगी की अहम भूमिका बतायी जाती है। भोपाल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद करुणा शुक्ला ने राजनीति में कदम रखा था।इनका विवाह मुंगेली (छत्तीसगढ़) के शुक्ला परिवार में हुआ था। उन्हें मध्यप्रदेश विधानसभा में रहते हुये बेस्ट एमएलए का खिताब भी मिला था। वर्ष 1982 से 2014 तक भाजपा में रहीं करुणा शुक्ला चुनाव में टिकट ना मिलने के कारण वर्ष 2014 में कांग्रेस ज्वॉइन की , लेकिन वे चुनाव नहीं जीत सकी।
राजनीतिक केरियर
करुणा शुक्ला वर्ष 1993 में पहली बार विधानसभा सदस्य चुनी गईं। वर्ष 2004 के लोकसभा के चुनावों में करुणा ने भाजपा के लिये जांजगीर सीट जीती थी। लेकिन 2009 के चुनावों में करुणा कांग्रेस के चरणदास महंत से हार गईं थीं। पूरे छत्तीसगढ़ में करुणा शुक्ला ही भाजपा की एकमात्र प्रत्याशी थीं जो चुनाव हारी थीं। बाकी के राज्य की सभी सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। भाजपा में रहते हुये करुणा कई महत्वपूर्ण पदों पर रहीं जिनमें भाजपा महिला मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद भी है। अभी वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में वो राजनांदगांव से पूर्व मुख्यमंत्री रमनसिंह के खिलाफ चुनाव मैदान में थी जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बेहद ही तेज तर्रार और आक्रामक शैली का भाषण देने वाली करूणा शुक्ला की छवि हमेशा से सधी हुई राजनीतिक शख्सियत में रही है।


















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