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Thursday, May 27, 2021

पिथौरा।बस्तर के सीलगेर में पुलिस की गोलीबारी से आदिवासियों की मौत एवं मामले की जांच करने पहुंची टीम को पुलिस प्रशासन द्वारा रोके जाने का सर्व आदिवासी समाज पिथौरा ब्लाक ने कड़ी निंदा की

 


रमेश श्रीवास्तव CNI की रिपोर्ट

पिथौरा।बस्तर के सीलगेर में पुलिस की गोलीबारी से आदिवासियों की मौत एवं मामले की जांच करने पहुंची टीम को पुलिस प्रशासन द्वारा रोके जाने का सर्व आदिवासी समाज पिथौरा ब्लाक ने कड़ी निंदा की है।सर्व आदिवासी समाज  के पदाधिकारियों ने बताया कि 17 मई 2021 को बीजापुर सुकमा जिले के सीमावर्ती ग्राम सिलगेर में खुलने जा था।खुलने वाले पुलिस कैंप के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान आदिवासी ग्रामीणों पर लाठीचार्ज एवं फायरिंग की गई।जिसमें 3 ग्रामीणों की मौत हो गई  थी और कई ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए थे घटना में पुलिस द्वारा मृत आदिवासियों को नक्सली बताया गया है जो निंदनीय है। 

    सर्व आदिवासी समाज के ब्लॉक अध्यक्ष मनराखन ठाकुर ने कहा कि बस्तर में चल रहे पुलिस और नक्सलियों की लड़ाई में हमेशा बेगुनाह आदिवासी मारे जा रहे हैं बस्तर में आज आदिवासी सबसे ज्यादा शोषित व पीड़ित है। सिलगेर में हुए घटना की जांच हेतु छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज द्वारा उक्त घटना की जांच पड़ताल के लिए 15 सदस्यों का जांच दल गठित किया गया है। जो जांच हेतु उच्च घटनास्थल पर रवाना हुए किंतु वहां पुलिस प्रशासन के द्वारा उन्हें जानबूझ कर रोक दिया गया एवं आगे बढ़ने नहीं दिया गया जिसे लेकर पूरे प्रदेश के आदिवासी समाज मे काफी आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने कहा कि सूरजपुर में एक व्यक्ति को एक थप्पड़ लगाने वाले कलेक्टर पर कार्यवाही 1 दिन में और इधर बस्तर मे जान लेने वालो  पर 1 माह के भीतर रिपोर्ट सौपने का निर्देश दिया गया है  यह सरकार का दो मुही राजनैति है।

 उपाध्यक्ष तुलसी दीवान ने बताया कि उक्त घटना को लेकर पूरे महासमुंद जिले के आदिवासी समाज  में नाराजगी है और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।

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