शिवशंकर पाण्डेय
बिरसा । सालेटेकरी।दो भाई एक साथ रहते थे।दोनों बहुत बड़े खुरापाती थे।दूसरों के घर मे आग लगाकर तमाशा देखने में इनको बड़ा मजा आता था।एक दिन किसी ने इनके घर मे आग लगा दिया।अब दोनों को कुछ नही सूझ रहा था।गांव वाले तरस खाकर आग को बुझाने में लग गए।दोनों भाई में से एक ने आग बुझाने वाले से कहा कि भैया हमारी तम्बाकू वाली डिबिया अंदर में है तनिक निकाल कर ला देते तो बड़ी मेहरबानी होती?गांव वालों ने कहा कि इन गंवारों को अपने घर की नही पड़ी है ऐसे विषम परिस्थिति में तम्बाकू की डिबिया की पड़ी है।
आज यही स्थिति देश की हो गयी है।पूरा देश कोरोना के आग में जल रहा था और हमारे देश व प्रदेश के पालनहार कहे जाने वाले प्रधानमंत्री, गृहमंत्री व मुख्यमंत्री को चुनाव दिख रहा था।धन्य हो हमारे देश के कहने वाले पालनहार।यह खूबी तो हमारे देश के नेताओं में ही हो सकती है कि जब घर मे आग लगी हो और तमाशा देखने बाहर जा रहे हो!2020 में जब कोरोना ने देश मे दस्तक दिया था उस समय ताली,थाली,घंटी बजाना पूरी लाइट बंद करना आदि जो जो हमारे प्रधानमंत्री जी ने कहा देश ने सर्वोपरि मानकर उसको किया और देश से कोरोना रूपी राक्षस लगभग समाप्त भी हो चुका था।लेकिन 2021 लगते ही फिर से कोरोना ने पांव पसारना शुरू कर दिया जिसको देश के नेताओ के साथ साथ जनता ने भी नजरअंदाज किया जिसका नतीजा आज सबके सामने है।
इसी बीच पांच राज्यों में चुनावी बिगुल बज गया।जिसमें सत्ता की लालसा लिए देश के शीर्ष नेताओं ने अपना अपना बोरिया बिस्तर बांधकर उन राज्यों में चुनावी सभा करने लगे जहाँ चुनाव होना था और सत्ता की लोलुपता इतनी बड़ी हो गयी कि इनको कोरोना का डर तनिक मात्र नही रहा।जिसका नतीजा चुनाव के बाद निकला, कोई जीतकर भी हार गया और जो हारा हुआ था उसका चेहरा देखते ही बनता था।न घर के रहे न घाट के।न चुनाव जीते न कोरोना को बढ़ने से रोक पाए।आज देश पूछता है क्या देश की जनता से बढ़कर चुनाव हो गया था?और चुनाव जरूरी भी था तो क्या बड़ी बड़ी सभा करना जरूरी था?
जितना खर्चा चुनाव में आने जाने, सभा करने,चुनावी रैली में,मतदाताओं को लुभाने में किया गया क्या वह सही था?पूछता है भारत।जिस प्रधानमंत्री के कहने पर समस्त देशवासी अपने अपने घरों में अंधेरा कर,ताली बजाकर और थाली बजाया तो क्या हमारे प्रधानमंत्री, गृहमंत्री व मुख्यमंत्री अगर उन पांच राज्यों की जनता से केवल मन की बात कहकर चुनाव में मतदान करने की अपील करते तो क्या चुनाव नही होता?शायद चुनाव बहुत अच्छे व शांत से हो जाता और बंगाल में हुआ चुनावी दंगो में हजारों लोग बेगुनाह मारे गए शायद वह भी बच जाते?चुनाव में हो रहे अनाप शनाप खर्चे पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को रोक लगाने की पहल करनी चाहिए जिससे देश को मजबूत बनाया जा सके।आज हर हाथ मे मोबाइल है और हर घर मे टेलीविजन है एससे प्रसार प्रचार करो,समय भी बचेगा और देश का पैसा भी जो दूसरे कार्यो में आएगा।
दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ कोरोना की कहर से कराह रहे थे।कही प्राण वायु की कमी थी तो कही बेड की।चारो तरफ हाहाकार मचा हुआ था।अपने आप को दबे कुचले और गरीब का नाम ढोने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि साहब भले ही हमें रुपया किलो चावल मत दो इस कोरोना से छुटकारा दिला दो।इतनी बड़ी बात उस व्यक्ति ने कहा जिसका घर रुपया में मिले चावलों से चलता है।लेकिन इस सबसे उन नेताओं को जरा सी भी शर्म नही आई जिन्होंने अपने पांच साल के कार्यकाल में करोड़ों अरबो हजमकर बैठे हैं।हमारे देश के अपनेआप को जनता का हितैषी कहने वाले नेताओं ने अगर चाहा होता तो एक एक लाख जोड़कर देश को ऑक्सीजन से पाट देते लेकिन अफसोस यह सब करने के लिए जनता के प्रति लगाव और इच्छा शक्ति का होना बहुत जरूरी है जो शायद इन नेताओं के पास नही है।कई राज्यो के क्षेत्रीय विधायक अपने विधायक निधि का पैसा क्षेत्र की जनता के ऊपर लगाने से कतराते है तो इनके जेब से रुपया निकालना टेडी खीर के बराबर है।
इतना बड़ा लोकतंत्र और संसाधनों से परिपूर्ण होने के बाद भी कोरोना पीड़ित मरीजों को ऑक्सीजन न मिलने कारण से हजारों लोगों ने दम तोड़ दिया लानत है ऐसे नेताओं पर।हर जगह लूट मची है कहाँ जाए देश की जनता और क्या करें? कहने को तो हम चांद पर चले गए पर केवल चांद पर चले जाने से देश की जनता का पेट नही भरता है।इनको चाहिए रोजगार, रोजी और दो वक्त की रोटी।आज देश जिस मुश्किलों से गुजर रहा है इससे उबर पाना शायद देश की जनता के बस की तो नही है।भले ही देश पटरी पर आ जाये, अर्थव्यवस्था सुधर जाए,सरकार बदल जाये लेकिन जो इस दुनिया से असमय चला गया क्या वह वापिस आएगा?क्या सरकार उस पांच वर्षीय बालक के सवालों का जबाब देगा जो पूछता है
कि हमारे मम्मी पापा कब आएंगे?एक घर से एक ही दिन में तीन तीन लाशों का जब जनाजा उठता है तो सुनकर मात्र रोएं खड़ी हो जाती है।सोचिए उस घर के लोगो के बारे में जिसका बेटा, बाप,पति,पत्नी,बहू ने असमय ही इस दुनिया से विदा ले लिया उनके ऊपर क्या बीतती होगी?कल्पना मात्र से ही आंसू निकल जाते हैं।लेकिन धन्य हो हमारे देश के नैया खेवहिया आपको प्रणाम है।जो इतना सब कुछ होने के बाद भी चुप हैं।


















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.