अरविंद तिवारी रिपोर्टर जांजगीर
मासिक महामारी
मासिक धर्म स्वच्छता दिवस विशेष
मत समझो इसे अछूत या बिमारी।
होती है जो स्त्रियों को महामारी ।।
शर्म नहीं ये मासिक धर्म ,
सहनशीलता की परीक्षा है।
समझते सब क्यो अशुद्ध इसे ,
ये देह शुद्धि की परिचर्चा है ।।
पीड़ाओं से घिरी ये पंच-दिवस ,
स्त्रियों की सुन्दरता पर एहसान है ।
खून लगा दाग बिस्तर पर
किसी नव जीवन का ही फरमान है ।।
सदियों से चली अजीब ये रिवाज ।
अछूत समझ दूर रखते भी हैं आज ।।
जो वरदान है मिला ईश्वर से ,
क्यों उसे खुद से दूर रखते हो ।
ये दिन याद दिलाती हर पल
जब वंश बढ़ाने को चहकते हो ।।
मत समझो इसे अछूत या बिमारी ,
होती है जो स्त्रियों को महामारी ।
वंशवृद्धि की है ये सफल निशानी
प्राणि मात्र सबने ये मानीं।।
सरिता पटेल
ग्राम कछार
जिला - रायगढ़ (छग)


















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