इस वर्ष भी नहीं होंगे श्रद्धालुओं को भोलेनाथ के दर्शन मंडीप खोल गुफा के रहस्यमयी मंडीप खोल गुफा, साल में केवल एक दिन खुलता है द्वार, शीतल छांव में विराजित हैं महाकाल
अक्षय तृतीया के बाद पड़ने वाले पहले सोमवार को खुलती है गुफा
मंडीप खोल गुफा में भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं ने आधी रात से ही पहाड़ी पर डेरा डाल दिया था।
साल्हेवारा/राजनांदगांव। जिले के खैरागढ विधानसभा के अंतर्गत आने वाला छुईखदान विकासखण्ड में स्थित मंडीप खोल गुफा इस साल कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में यह दूसरी बार होगा जब पर्यटको को मंडीपखोल गुफा घुमने का मौका नही मिलेगा। बीते चौदह माह से पुरे विश्व में फैली कोरोना महामारी एवं जिले में जारी लॉकडाउन के चलते पर्यटक मंडीपखोल गुफा का दर्शन नही कर पाएंगे। छुईखदान ब्लॉक मुख्यालय से करीब 55 किमी दूर यह गुफा है। मंडीपखोल गुफा भारत की
पहली एवं एशिया की दूसरी सबसे बड़ी व लंबी गुफा है जो साल में केवल एक बार अक्षय तृतीया के बाद आने वाले प्रथम सोमवार को खोली जाती है। 14 मई को अक्षय तृतीया का पर्व था। इस बार यह गुफा 17 मई को खुलनी थी, लेकिन संक्रमण के चलते इस साल भी गुफा नहीं खुलेगी।
मंडीप खोल गुफा में भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं ने आधी रात से ही पहाड़ी पर डेरा डाल दिया करते थे । सुबह तड़के लोग श्वेत गंगा (गुफानुमा कुंड) में नहाने के बाद गुफा में प्रवेश कर शिवलिंग का दर्शन किया करते थे। सुबह तड़के से शाम तक करीब 20 हजार श्रद्धालुगण शिवलिंग का दर्शन कर पूजा-अर्चना किया करते थे।
आसपास गांव सहित पूरे जिलेभर व मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते रहे है । इससे परम्परा के अनुसार अक्षय तृतीया के पहले सोमवार को सुबह 8 बजे ठाकुरटोला राजपरिवार के लाल रोहित सिंह पुलस्तय राजपुरोहित के साथ शिवलिंग की पूजा-अर्चना के लिए गुफा में प्रवेश किया करते है। इसके बाद ही इसे लोगों के दर्शन के लिए खोला जाता रहा है। जंगली जानवरों सहित अन्य जीव जंतुओं को भगाने के लिए यहां पटाखा भी फोड़ा जात है। व गुफा खुलने के पूर्व सुरक्षा के लिहाज से 3 दिन पूर्व ही गुफा मे जंगली जानवर व अन्य सुरक्षा की जांच की जाती है।
राजनांदगांव जिला मुख्यालय से करीब 80 किमी की दूरी तय कर इस रहस्यमयी गुफा में * CNI न्यूज़* की टीम भी साल्हेवारा संवाददाता स्थानीय पत्रकार दिलीप शुकला के साथ पहुंचती रही है। लोगों का जत्था दुर्गम रास्ते से होकर पूरे उत्साह व आत्मविश्वास व रोमांच के साथ भारी भीड़ में गुफा की ओर बढ़ते दिखाई देते रहे है। मोटर साइकिल,चार पहिया वाहनों सहित अन्य वाहनों में लोग गुफा की ओर बढ़ते रहते थे। पथरीले व कच्चे रास्ते पहाड़ी से बहने वाली नदी को अलग-अलग जगहों पर 16 बार पार करते हुए हम भी गुफा तक पहुंच चुके थे।
यहां श्वेत गंगा कुंड में लोग डुबकी लगाने के लिए कतार पर खड़े रहते थे। बताया जाता है कि इस कुंड में पूरे साल भर पानी निकलते रहता है। यहां कुंड की मान्यता है कि जो भी इस कुंड में डुबकी लगाते है उन लोगों के कुष्ट रोग दूर होता है, ऐसी मान्यता है। कुंड में 'सीएनआई की टीम भी 2018 में उतरी थी। बेहद ठंडा पानी। कुछ दूर जाने पर घूप अंधेरा। कुंड में करीब तीन से चार फीट तक पानी भरा था, जो धीरे धीरे बह रहा था।
यहां स्नान के बाद हम मंडीपखोल गुफा के मुख्य द्वार की ओर बढ़ते है इस बीच गुफा तक लोगों का तांता लगा रहा। गुफा में प्रवेश के लिए भारी भीड़ जुटी रहती थी। जैसे-तैसे भी प्रवेश कर लिए करते थे। गुफा में घुसते ही अंदर तीन से चार रास्ता दिखाई दिया। यहां तापमान करीब 14 -18 डिग्री रहा होगा। बेहद शीतल और शांति का अनुभव हुआ। गुफा का छोटा सा सफर बेहद आनंदित करने वाला व रोमांचक रहता है।
गुफा से शिवलिंग का दर्शन कर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर समिति व ग्रामीणों द्वारा महाप्रसादी भंडारे का आयोजन किया जाता है । मंदिर समिति के सदस्यों के द्वारा भोजन बनाने व पीने के लिए साफ पानी गंडई व छुईखदान से टैंकर के माध्यम से लाना पड़ता है।इस मण्डीप खोल गुफा के सामने लगभग किलो दो किलोमीटर की दूरी तक विशालकाय मेला लगता है व जगह जगह दानवीरों के शर्बत,फलफ्रूट, भोजन,नाश्ता व अन्य खाने पीने की सामग्री का भण्डार लोगो को निशुल्क दानदाता व श्रद्धालुगण स्टाल लगा लगा कर पुण्यलाभ अर्जित करते है व कुछ लोग इस माध्यम से मानी गयी मन्नत को पूर्ण करने आते रहे है। लेकिन इस दूसरी बार इस दूसरे लाकडाउन में उनकी ये मन्नत आगे आने वाले समय पर ही अब पूर्ण करनी होगी।।
राजनांदगाँव से खैरागढ,छुईखदान होते हुवे नर्मदा पहुंचा जाता है नर्मदा पहुंचकर मलाजखण्ड,कान्हा किसली राष्ट्रीय राजमार्ग पर साल्हेवारा व नर्मदा के बीच पड़ने वाला पैलीमेंटा गांव से ठाकुरटोला होते हुवे लगभग 16 किलोमीटर की दूरी व 16 बार नदियों को पार करने के पश्चात आप मण्डीपखोल गुफा पहुंच जाते है।
चोडराधाम के चौड़ेश्वर महादेव भी है प्रसिद्ध,इस दिन लोगो की वंहा भी रहती है भीड़
इसी मार्ग पर पैलीमेंटा घाट की चढ़ाई पूरी होने के साथ ही बायीं और जाकर लगभग आधा किलोमीटर की दूरी तय कर आप इस अलौकिक व प्राकृतिक महादेव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है।डोंगेश्वर,चौड़ेश्वर महादेव की महिमा अलग ही है
abcd





























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