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Monday, May 17, 2021

आदि शंकराचार्य सर्व मार्गदर्शक --- झम्मन शास्त्री

 


अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

रायपुर -- शिवावतार भगवत्पाद आदि शंकराचार्य महाभाग के प्राकट्य महोत्सव पर उनके द्वारा संस्थापित चार आम्नाय पीठों के साथ ही पूरे राष्ट्र में कोरोना महामारी के बीच समुचित सुरक्षा नियमों का पालन करने हुये विभिन्न आराधना पूजन आयोजित किया गया ।पुरी शंकराचार्य स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज द्वारा संस्थापित संगठन धर्मसंघ पीठपरिषद्, आदित्य वाहिनी--आनन्द वाहिनी की छत्तीसगढ़ इकाई के द्वारा विभिन्न स्थानों पर प्राकट्य महोत्सव मनाया गया। इसी क्रम में भाटापारा  में आचार्य झम्मन शास्त्री जी के निवास प्रांगण में रुद्राभिषेक आराधना एवं भजन संध्या का भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ ,

 इस पुनीत अवसर पर शास्त्री जी ने कहा भारत भूमि धन्य है जहां धर्म एवं राष्ट्र रक्षा के लिये समय-समय पर भगवान का कई रूपों में अवतार होता है । इसी क्रम में केरल प्रांत के कालटी ग्राम में 2528 वर्ष पूर्व आदि शंकराचार्य भगवान का प्राकट्य हुआ उन्होंने अल्प समय में दिग्विजय यात्रा कर हिंदुओं के प्रशस्त मान बिंदुओं की रक्षाकर तीर्थों को सुरक्षित किया, साथ ही यज्ञ  भजन , पूजा , कथा आदि की परंपरा को पुनः स्थापित किया वहीं तीर्थों तथा मंदिरों की व्यवस्था को पुनः भारतीय संस्कृति की परंपरा अनुकूल सुदृढ़ किया। वैदिक शासन तंत्र की स्थापना  कर , व्यासगद्दी और राजगद्दी का शोधन कर समाज में शांति समृद्धि सौहार्द की स्थापना की,  दिशाहीन शासन तंत्र को स्वस्थ मार्गदर्शन प्रदान कर धर्म नियंत्रित शासन तंत्र की स्थापना कर चार दिशाओं में चार पीठों की परंपरा चलायी। आज भी देश के चार  शंकराचार्यो की मठों की परंपरा  प्रतिष्ठित है जो कि हिंदुओं के सार्वभौम धर्म गुरु हैं । 

दस सन्यासियों को गिरी , पुरी ,भारती ,सागर ,आश्रम ,वन  , सरस्वती , तीर्थ आदि विभिन्न स्थलों में सनातन धर्म की परंपरा के संरक्षण के लिए दिशा प्रदान की। आज भी आदि गुरु शंकराचार्य का सिद्धांत परम उपयोगी है उनके दिव्य विचारों का अधिक से अधिक प्रचार कर समाज तथा देश हित में उपयोग करने की आवश्यकता है। इसी तरह कवर्धा जिले में आद्य शंकराचार्य का प्राकटय महोत्सव धूमधाम से मनाया गया।आदित्यवाहिनी के प्रदेश महामंत्री अवधेशनन्दन श्रीवास्तव ने बताया कि पुरी पीठाधीश्वर श्रीमज्जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाभाग द्वारा संस्थापित पीठ परिषद, आदित्यवाहिनी और आनन्दवाहिनी के सदस्यों द्वारा अपने अपने घरों में रहकर  हर्षोल्लासपूर्वक प्राकटय महोत्सव मनाया गया किन्तु वैश्विक महामारी कोविड 19 के कारण किसी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन नहीं किया गया। सदस्यों ने  शासन के निर्देशों का पालन करते हुये  अपने निवास में ही शिवपूजन, आराधना , सत्संग , एवम भजन संकीर्तन के द्वारा महाप्रभु के श्रीचरणों में  महामारी के समूल नाश और समस्त प्राणियों के उत्तम आरोग्य और विश्व कल्याण के लिये प्रार्थना की। 

इस अवसर पर आदि शंकराचार्य जी के जीवनवृत्त का स्मरण किया गया कि  किस प्रकार ईस्वी सन से 507 वर्ष पूर्व जब सनातन धर्म और संस्कृति पर चहुंओर से आक्रमण हो रहा था और समस्त सनातन मान बिंदुओं पर कुठाराघात हो रहा था तभी सनातन धर्म की रक्षा के लिये भगवत्पाद आद्य शंकराचार्य महाभाग का अवतरण हुआ था। उस घोर संकटकाल में भगवान शंकराचार्य ने ही  हिंदुओं के प्रशस्त मान बिंदुओं की रक्षा की। उन्होंने चतष्मनाय चतुष्पीठ की स्थापना करते हुये चारों दिशाओं में एक एक शंकराचार्य अभिषिक्त किये। भगवान शंकराचार्य ने दिशाहीन शासन तंत्र एवम व्यास पीठ का शोधन किया एवम सनातन मानबिन्दुओं की रक्षा करते हुये वैदिक साम्राज्य की स्थापना की। भगवान आद्य शंकराचार्य महाभाग ही धर्मनियन्त्रित, पक्षपातविहीन ,शोषण विनिर्मुक्त शासन तंत्र के उद्भाषक हैं।

 उसी परम्परा की स्थापना में गोवर्द्धन मठ पुरी के मान्य 145 वें श्रीमज्जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाभाग हमारे अस्तित्व आदर्श की रक्षा तथा देश की सुरक्षा एवम अखंडता के लिये स्वस्थ क्रांति का सूत्रपात कर कटिबद्धतापूर्वक निरन्तर मार्गदर्शन कर रहे हैं। आदि शंकराचार्य महाभाग द्वारा संस्थापित  शंकराचार्य परंपरा से सभी सनातनी धर्मावलंबियों को जोड़ने हेतु अभियान संचालन के संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ सहित देश भर में कार्यक्रम का समापन हुआ ।

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