15 साल के बालक ने डिप्रेशन में आकर आत्महत्या जैसा कदम उठाया।
बच्चें मोबाइल में ऑनलाइन पढ़ाई में रूचि रखने के बजाए पबजी गेम सहित अन्य फोकस ज्यादा कर रहे है।
बेमेतराः नाबालिग ने लगाई फांसी,सुसाइड नोट में आखिरी बार कहा-काम पर नहीं जाऊंगा
नांदघाट थाना के ग्राम टेमरी की घटना, मर्ग कायम कर जांच में जुटी पुलिस
देव यादव CNI न्यूज़ बेमेतरा
बेमेतरा। जिले में आत्महत्या की घटनाएं बढ़ती जा रही है। कई मामलों में तो घर में पारिवारिक झगड़े से तंग आकर आत्महत्या जैसे कदम उठाए जा रहे है। ऐसा ही एक मामला नांदघाट थाना में सामने आया है। यहां महज 15 साल के बालक ने सुसाइड नोट लिखकर आत्महत्या कर ली। बेमेतरा जिले का संभवत यह पहला मामला है। जहां 15 साल के बालक ने डिप्रेशन में आकर आत्महत्या जैसा कदम उठाया। घटना 2 मई मंगलवार की है।
नांदघाट थाना प्रभारी विपिन रंगारी ने बताया कि मृतक भूपेन्द्र पाल कक्षा आठवी का छात्र था। इस साल कक्षा नवमी की पढ़ाई करता। आत्महत्या करने के पहले बालक ने काॅपी में सुसाइड नोट लिखकर छोड़ा है। जिसमें अपने दादा को कपड़ा दुकान में काम करने नहीं जाने का जिक्र किया है। श्री रंगारी ने बताया कि जिस समय घटना हुई घर के सभी सदस्य खेत में काम करने गए हुए थे। मृतक भूपेन्द्रघर में अकेला था। घर के बच्चों ने खिड़की से झांक कर देखा तो भूपेन्द्र ने नायलोन की रस्सी से फांसी लगा ली थी। परिजनों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। जहां पुलिस ने घटनास्थल पहुंचकर पंचनामा कर शव को पीएम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र नवागढ़ भेज दिया। पीएम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। इधर पुलिस सुसाइड नोट के आधार पर परिजनों और दुकानदार से पूछताछ में जुट गई है। रंगारी ने बताया कि सुसाइड नोट के आधार पर पूछताछ की जा रही है।
सावधानः बच्चों के व्यवहार को लेकर रहे सतर्क
लाॅकडाउन के दौरान ही डिप्रेशन में आकर बीते दो तीन महीने के भीतर कई लोगों ने आत्महत्या जैसे कदम उठाए है। डाॅक्टरों का भी मानना है कि लाॅकडाउन के दौरान जहां लोग परिवार के साथ रहे है। वही इस दौरान पारिवारिक झगड़े भी हुए है। बीते दो साल से स्कूल बंद होने के बाद से बच्चों का पढ़ाई से ध्यान हट गया हैं। बच्चें मोबाइल में ऑनलाइन पढ़ाई में रूचि रखने के बजाए पबजी गेम सहित अन्य फोकस ज्यादा कर रहे है। इससे बच्चे डिप्रेशन में आकर आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे है। इससे पालक सजग होकर अपने बच्चों के गतिविधियों पर ध्यान दे। साथ ही समय समय पर बच्चों की रूचिकर चीजों पर फोकस कर समय निकाले तो इस तरह की घटनाएं नहीं होगी।



















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