अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
गांधीनगर - गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा सौंप दिया है। पिछले कुछ महीनों में ही भाजपा ने कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बदला है। अभी यहां नये मुख्यमंत्री कौन बनेगा इसकी जानकारी नही है। गुजरात में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा आगामी चुनाव की जीत को सुनिश्चित करने तथा भाजपा को फिर बड़ी जीत दिलाने मुख्यमंत्री के लिये नये चेहरा सामने लाना चाहती है। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल , केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडवीया , केंद्रीय मंत्री परसोत्तम रूपाला तथा गुजरात भाजपा के उपाध्यक्ष गोवर्धन झड़फिया का नाम अधिक चर्चा में है। मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद विजय रूपाणी ने कहा मैं भारतीय जनता पार्टी के प्रति अपना आभार प्रकट करता हूं कि मेरे जैसे पार्टी के कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री जैसे पद की जिम्मेदारी दी। मेरे कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का विशेष मार्गदर्शन मिलता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन मे गुजरात समग्र विकास के पथ पर आगे बढते हुये नये आयाम को छुआ है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान जनता से मिले समर्थन के लिये गुजरात की जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी मिलेगी उसका वे पूरी तरह निर्वहन करेंगे। गौरतलब है कि विजय रूपाणी को वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को हटाकर गुजरात की कमान सौंपी गई थी।
राजनीतिक सफर
विजय रूपाणी ने अपनी राजनीति की शुरुआत काफी निचले स्तर से शुरू की थी। अभाविप के छात्र कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने अपनी राजनीति की पारी शुरू की थी। इसके बाद वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गये। इमरजेंसी के दौरान रूपाणी भी कई नेताओं की तरह 11 महीने के लिए जेल गये थे , लेकिन समय के साथ-साथ राजनीति पर उनकी पकड़ भी मजबूत होती चली गई। विजय रूपाणी वर्ष 1978 से 1981 तक वह संघ के प्रचारक भी रहे , लेकिन उनकी राजनीति की पारी का सबसे अहम मोड़ उस वक्त आया जब उन्होंने वर्ष 1987 में राजकोट नगर निगम के चुनाव में कार्पोरेटर के तौर पर जीत हासिल की। राजनीति की यह पहली ऐसी सीढ़ी थी जिस पर उन्होंने कामयाबी हासिल की थी। इसके बाद वह ड्रेनेज कमेटी के चेयरमैन बने। इसके एक वर्ष बाद ही वह राजकोट नगर निगम में स्टेंडिंग कमेटी के चेयरमैन बनाये गये। इस पद पर वे वर्ष 1996 से लेकर 1997 तक रहे। गुजरात भाजपा में उनके लगातार बढ़ते कद को भांपते हुये ही उन्हें वर्ष 1998 में प्रदेश में पार्टी का महासचिव बनाया गया , इस पद के लिये वे चार बार चुने गये। इसके अलावा केशूभाई पटेल ने उन्हें मेनिफेस्टो कमेटी का चेयरमैन भी बनाया था। वर्ष 2006 में वह गुजरात ट्यूरिज्म के चेयरमैन बने। रूपाणी 2006 से लेकर 2012 तक राज्यसभा के भी सदस्य रह चुके हैं। वर्ष 2013 जिस वक्त नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे उस वक्त उन्हें गुजरात म्यूनिसिपल फाइनेंस बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था। राजनीति पर अच्छी पकड़ की बदौलत ही उन्हें 19 फरवरी 2016 को प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया। इसी दौरान भाजपा के आरसी फालदू को कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया जिसकी वजह से उन्हें राजकोट पश्चिम की सीट से इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में यहां से चुनाव लड़ने के लिये विजय रूपाणी को अधिकृत किया गया। 19 अक्टूबर 2014 को उन्होंने बड़े अंतर से कांग्रेस के नेता को हराया था। नवंबर 2014 में आनंदीबेन पटेल की सरकार में भी वे मंत्री बनाये गये थे। उन्हें ट्रांसपोर्ट , वाटर सप्लाई , लेबर एंड एंप्लाएमेंट विभाग सौंपा गया था।
वर्ष 2016 में पहली बार बने सीएम
रूपाणी ने सात अगस्त 2016 को पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद वर्ष 2017 में राज्य में विधानसभा चुनाव हुये थे , इसमें भाजपा ने बहुमत हासिल कर सरकार बनायी थी। भाजपा ने गुजरात में 182 सीटों में से 99 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था। विधानमंडल दल की बैठक में रूपाणी को विधायक दल का नेता और नितिन पटेल को उपनेता चुना गया था। रूपाणी ने 26 दिसंबर 2017 को दूसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।


















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