अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर - ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर अनन्तश्री विभूषित श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज राष्ट्र रक्षा अभियान के अंतर्गत पूरे राष्ट्र के प्रवास पर रहते हैं , इसी क्रम में वर्तमान में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर प्रवास पर हैं। महाराजश्री के प्रवास कार्यक्रम में आज प्रात:कालीन सत्र में श्रीशंकराचार्य जी उपस्थित श्रद्धालु भक्तवृंदों के धर्म , राष्ट्र एवं अध्यात्म से संबंधित जिज्ञासाओं का समाधान करते हैं। आज की संगोष्ठी में धर्मान्तरण के विषय में स्थिति स्पष्ट करते हुये अपने उद्बोधन में महाराज श्री ने कहा कि शासनतन्त्र की दिशाहीनता एवं अदूरदर्शिता के कारण हिन्दुओं को धर्मच्यूत किया जाता है। वर्तमान एटमबम , मोबाइल तथा कम्प्यूटर के युग में भी दार्शनिक , व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक धरातल पर सनातन धर्म सर्वोत्कृष्ट है , यह कटुसत्य है कि हिन्दुओं के ही धन का उपयोग हिन्दुओं के धर्मान्तरण में किया जाता है। धर्मान्तरण करने वालों के लिये सोचने का विषय है कि दलित व्यक्ति धर्मान्तरण के बाद भी दलित क्रिस्चियन ही कहलाकर वहाँ भी भेदभाव का शिकार रहता है , इसी तरह आरक्षण का लाभ लेकर निर्धन की निर्धनता दूर नहीं होना आरक्षण व्यवस्था पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। हमारे सनातन धर्म में कुटीर एवं लघु उद्योग अर्थ के पारम्परिक स्त्रोत हैं l सनातन धर्म में किसी भी व्यक्ति को फल से वंचित नहीं रखा गया है। सनातन वर्णाश्रम व्यवस्था में शिक्षा , रक्षा, अर्थ और सेवा के प्रकल्प में संतुलन रहता है परन्तु आधुनिक युग में ऐसी कोई विधा उपलब्ध नहीं। आदर्श शासक जैसे प्रहलाद , राम , युधिष्ठिर , चन्द्रगुप्त , सुधन्वा आदि की प्रशंसा की जाती है , इनके शासन व्यवस्था के मूल में सनातन धर्म का सिद्धान्त ही सन्निहित था। इस प्रकार धर्मान्तरण का कारण शासनतन्त्र की दोषपूर्ण नीति है , सनातन धर्म का इसमें दोष नहीं है। जो व्यक्ति धर्मान्तरण में संलग्न होते हैं इनके मूल में निर्धनता , व्यसन , भावुकता या भ्रम ही कारक होते हैं , धर्मच्यूत इन्हीं कारणों से संभावित होते हैं, अत: इन कारकों का निवारण किया जाये तो इस पर लगाम लगाया जा सकता है। इस संबंध में समाज को जागरूक होकर संगठित होने की आवश्यकता है l


















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