जो मधुर वा खाली हो वही भगवान को प्यारा है - आचार्य पंडित रवि शास्त्री महाराज
दमोह: जिले के ग्राम बरखेरा बैस मे चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा सुनाते हुए कथा वाचक आचार्य पंडित रवि शास्त्री महाराज ने कहा कि माता पार्वती का महात्मा अगस्त्य मुनि को पूर्व जन्म मे दिया गया भोजन निमंत्रण पूर्ण करने के लिए भगवान भोलेनाथ के समछ प्रस्ताव रखा तब भगवान भोलेनाथ ने बताया कि महात्मा अगस्त्य ने तीन आचमनी से पूरा समुद्र पी लिया था मां अन्नपूर्णा सम्पूर्ण जगत को भोजन देती है क्या एक व्यक्ति को भोजन नही करा सकती तब अगस्त्य जी को निमंत्रण किया गया
ओर अगस्त्य सम्पूर्ण प्रसाद पा गए अंत मे भगवान की प्रसादी खिलाने पर अगस्त्य तृप्त हो गए श्रीशास्त्री ने कहा कि परीक्षित शुकदेव को कह रहे हैं कि बांस की बांसुरी ने ऐसा कौन सा तप किया था कि उसे भगवान का सान्निध्य मिला तब शुकदेव कह रहे कि चार चार माह धूप गर्मी ठंड सहा ओर काटा गया व छेद किया गया तब बांसुरी ने कहा कि हमारे अन्दर कुछ नही है खाली है जब बोलते है मधुर बोलते है बिना बजाए नही बजते जो मधुर एवं खाली हो वही भगवान को प्रिय है।

















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